जब आप अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर कोई वेबसाइट खोलते हैं, तो पर्दे के पीछे एक ऐसी व्यवस्था काम कर रही होती है जो हर डिवाइस को एक अनोखी पहचान देती है। उसी पहचान को IP Address कहते हैं। बिना IP Address के इंटरनेट पर कोई भी दो डिवाइस एक-दूसरे को पहचान नहीं सकते — न आपका फोन वेबसाइट के सर्वर को ढूंढ पाएगा, न ही सर्वर आपके फोन तक जवाब पहुंचा पाएगा।
सरकारी परीक्षाओं में — चाहे SSC हो, बैंकिंग हो, रेलवे हो या पुलिस भर्ती — कंप्यूटर जागरूकता के पेपर में IP Address से जुड़े सवाल हर साल पूछे जाते हैं। IPv4 और IPv6 का अंतर, IP की क्लासेज, सबनेट मास्क और localhost जैसे टॉपिक परीक्षा में बार-बार आते हैं। इस लेख में IP Address को शुरुआत से आखिर तक, सरल हिंदी में, उदाहरणों और टेबल के साथ समझाया गया है।
यह लेख उन पाठकों के लिए है जो नेटवर्किंग की बुनियाद समझना चाहते हैं। अगर आपने अभी तक LAN, WAN और MAN वाले नेटवर्क के प्रकार नहीं पढ़े हैं, तो पहले वह जानकारी पढ़ना अच्छा रहेगा, क्योंकि IP Address उसी नेटवर्क की दुनिया का पता-ठिकाना है।
इस पेज में:
- IP Address क्या है?
- IP Address कैसे काम करता है?
- IPv4: 32-बिट वाला पुराना सिस्टम
- IPv6: 128-बिट वाला नया सिस्टम
- IPv4 बनाम IPv6: पूरी तुलना
- IP Address के दो भाग: Network ID और Host ID
- IP Address की 5 Classes: A, B, C, D, E
- Subnet Mask क्या है?
- Static IP बनाम Dynamic IP
- Public IP बनाम Private IP
- Localhost और 127.0.0.1 क्या है?
- परीक्षा में पूछे जाने वाले खास बिंदु
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
IP Address क्या है?
IP Address का पूरा नाम Internet Protocol Address है। यह नंबरों (या नंबर और अक्षरों) की एक अनोखी श्रृंखला होती है जो इंटरनेट या किसी लोकल नेटवर्क से जुड़े हर डिवाइस को एक अलग पहचान देती है। जैसे हर घर का एक डाक पता होता है ताकि डाकिया सही घर तक चिट्ठी पहुंचा सके, वैसे ही हर डिवाइस का एक IP Address होता है ताकि डेटा का पैकेट सही डिवाइस तक पहुंच सके।
जब दो कंप्यूटर इंटरनेट पर बात करते हैं, तो वे एक-दूसरे को नाम से नहीं, IP Address से पहचानते हैं। आप ब्राउज़र में जो वेबसाइट का नाम लिखते हैं (जैसे कोई भी डोमेन), वह नाम पहले DNS (Domain Name System) नाम की व्यवस्था से IP Address में बदला जाता है, और फिर उसी IP Address पर आपका अनुरोध भेजा जाता है।
एक साधारण उदाहरण से समझें: मान लीजिए आपके घर का पता “मकान नंबर 25, गली नंबर 4, नई दिल्ली” है। इसमें “नई दिल्ली” बड़ा क्षेत्र बताता है और “मकान नंबर 25, गली नंबर 4” उस क्षेत्र के अंदर आपका खास घर बताता है। ठीक वैसे ही IP Address के भी दो हिस्से होते हैं — एक हिस्सा नेटवर्क बताता है और दूसरा उस नेटवर्क के अंदर खास डिवाइस बताता है। इन दो हिस्सों के बारे में आगे विस्तार से बताया गया है।
IP Address दो मुख्य वर्ज़न में आता है: IPv4 (पुराना, 32-बिट) और IPv6 (नया, 128-बिट)। आज की तारीख में दोनों ही इस्तेमाल हो रहे हैं, इसलिए परीक्षा में दोनों के बारे में पूछा जाता है।
IP Address कैसे काम करता है?
IP Address के काम करने का तरीका चार चरणों में समझा जा सकता है:
- पहचान: नेटवर्क से जुड़ते ही हर डिवाइस को एक IP Address मिलता है — या तो खुद-ब-खुद (DHCP से) या पहले से तय किया हुआ।
- पैकेट बनना: जब आप कोई डेटा भेजते हैं (जैसे वेबसाइट खोलना), तो वह डेटा छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट जाता है जिन्हें पैकेट कहते हैं। हर पैकेट पर भेजने वाले और पाने वाले का IP Address लिखा होता है।
- रूटिंग: राउटर नाम के डिवाइस इन पैकेटों को पढ़ते हैं और IP Address देखकर तय करते हैं कि पैकेट को किस रास्ते भेजना है। यह बिल्कुल डाकघर की तरह है — पते को देखकर चिट्ठी सही दिशा में भेजी जाती है।
- डिलीवरी: पैकेट सही IP Address वाले डिवाइस तक पहुंचते हैं और वहां फिर से जुड़कर पूरी जानकारी बन जाते हैं।
इस पूरी प्रक्रिया में IP Address ही वह “पता” है जिसके बिना डिलीवरी असंभव है। इसीलिए कहा जाता है कि IP Address इंटरनेट की नींव है।
IPv4: 32-बिट वाला पुराना सिस्टम
IPv4 का पूरा नाम Internet Protocol version 4 है। यह IP Address का सबसे पुराना और आज भी सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला वर्ज़न है। इसकी खास बातें:
- यह 32-बिट का एड्रेस होता है, यानी इसमें 32 बाइनरी अंक (0 या 1) होते हैं।
- इसे लिखने के लिए 32 बिट को 8-8 बिट के 4 हिस्सों (octet) में बांटा जाता है।
- हर octet को दशमलव (decimal) में लिखा जाता है, जिसकी रेंज 0 से 255 तक होती है।
- चारों octet को बिंदु (dot) से अलग किया जाता है। जैसे: 192.168.1.1
- IPv4 से कुल लगभग 4.3 अरब (2 की घात 32) अनोखे एड्रेस बनाए जा सकते हैं।
उदाहरण: 192.168.10.26 एक IPv4 एड्रेस है। इसमें 192, 168, 10 और 26 — चारों octet हैं, और हर एक 0 से 255 के बीच है।
जब इंटरनेट शुरू हुआ था, तो 4.3 अरब एड्रेस बहुत ज़्यादा लगते थे। लेकिन जैसे-जैसे मोबाइल, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी और IoT डिवाइस बढ़े, IPv4 के एड्रेस खत्म होने लगे। इसी समस्या को सुलझाने के लिए IPv6 लाया गया।
IPv6: 128-बिट वाला नया सिस्टम
IPv6 का पूरा नाम Internet Protocol version 6 है। यह IPv4 का उन्नत और आधुनिक वर्ज़न है, जिसे एड्रेस की कमी दूर करने के लिए बनाया गया। इसकी खास बातें:
- यह 128-बिट का एड्रेस होता है — IPv4 से चार गुना लंबा।
- इसे हेक्साडेसिमल (0-9 और A-F) में लिखा जाता है, क्योंकि दशमलव में लिखना बहुत लंबा हो जाता।
- 128 बिट को 16-16 बिट के 8 हिस्सों (hextet) में बांटा जाता है।
- हर hextet की रेंज 0 से FFFF (हेक्साडेसिमल) तक होती है, यानी दशमलव में 0 से 65535 तक।
- आठों हिस्सों को कोलन (:) से अलग किया जाता है। जैसे: 2001:0db8:0000:0000:0000:ff00:0042:8329
- लगातार शून्य वाले हिस्सों को छोटा करके लिखा जा सकता है — जैसे ऊपर वाले एड्रेस को 2001:db8::ff00:42:8329 भी लिखा जा सकता है।
- IPv6 से कुल 2 की घात 128 एड्रेस बन सकते हैं — यह संख्या इतनी बड़ी है (लगभग 340 अनडेसिलियन) कि धरती के हर रेत के दाने को भी कई-कई एड्रेस मिल जाएं।
- IPv6 में कोई क्लास सिस्टम नहीं होता — A, B, C, D, E वाली क्लासेज सिर्फ IPv4 में हैं।
IPv6 में बिल्ट-इन सुरक्षा (IPsec) और बेहतर रूटिंग की सुविधा भी है, जो इसे सिर्फ बड़ा ही नहीं, बेहतर भी बनाती है।
IPv4 बनाम IPv6: पूरी तुलना
परीक्षा में IPv4 और IPv6 के अंतर पर सीधा सवाल आता है। यह टेबल एक बार में पूरा अंतर साफ कर देगी:
| विशेषता | IPv4 | IPv6 |
|---|---|---|
| पूरा नाम | Internet Protocol version 4 | Internet Protocol version 6 |
| एड्रेस की लंबाई | 32 बिट | 128 बिट |
| लिखने का तरीका | दशमलव (decimal), बिंदु से अलग | हेक्साडेसिमल, कोलन से अलग |
| हिस्सों की संख्या | 4 octet (8-8 बिट) | 8 hextet (16-16 बिट) |
| हर हिस्से की रेंज | 0 से 255 | 0 से FFFF (0 से 65535) |
| उदाहरण | 192.168.1.1 | 2001:db8::ff00:42:8329 |
| कुल एड्रेस | लगभग 4.3 अरब | लगभग 340 अनडेसिलियन |
| क्लास सिस्टम | है (A, B, C, D, E) | नहीं है |
| सुरक्षा | अलग से जोड़नी पड़ती है | IPsec बिल्ट-इन |
| हेडर | बदलती लंबाई का, जटिल | तय लंबाई का, सरल |
याद रखने की ट्रिक: “4-32-दशमलव-बिंदु” और “6-128-हेक्सा-कोलन” — IPv4 में 4 octet, 32 बिट, दशमलव, बिंदु; IPv6 में 8 हिस्से, 128 बिट, हेक्साडेसिमल, कोलन।
IP Address के दो भाग: Network ID और Host ID
हर IPv4 एड्रेस के दो भाग होते हैं:
- Network ID (नेटवर्क भाग): यह बताता है कि डिवाइस किस नेटवर्क से जुड़ा है। एक ही नेटवर्क के सारे डिवाइसों का Network ID एक जैसा होता है।
- Host ID (होस्ट भाग): यह बताता है कि उस नेटवर्क के अंदर कौन-सा खास डिवाइस है। हर डिवाइस का Host ID अलग होता है।
उदाहरण: 192.168.1.10 में अगर Network ID “192.168.1” है, तो Host ID “10” है। इसका मतलब है कि यह डिवाइस “192.168.1” नाम के नेटवर्क का 10 नंबर वाला सदस्य है। उसी नेटवर्क का दूसरा डिवाइस “192.168.1.11” हो सकता है — Network ID वही, Host ID अलग।
Network ID और Host ID का बंटवारा कहां होगा, यह Subnet Mask तय करता है (जिसके बारे में आगे बताया गया है) और IP की क्लास भी इसमें भूमिका निभाती है।
परीक्षा टिप: सवाल अक्सर ऐसे आते हैं — “IP Address के कितने भाग होते हैं?” — जवाब: दो (Network ID और Host ID)।
IP Address की 5 Classes: A, B, C, D, E
IPv4 के एड्रेस को अच्छे से व्यवस्थित और प्रबंधित करने के लिए उन्हें 5 क्लासेज में बांटा गया है। हर क्लास पहले octet (पहले हिस्से) की रेंज से पहचानी जाती है। क्लास यह तय करती है कि नेटवर्क कितना बड़ा होगा — यानी Network ID में कितने बिट और Host ID में कितने बिट होंगे।
1. Class A — बहुत बड़े नेटवर्क के लिए
- पहले octet की रेंज: 1 से 126
- पहला octet = Network ID, बाकी तीन octet = Host ID
- हर नेटवर्क में लगभग 1.6 करोड़ होस्ट जुड़ सकते हैं
- इस्तेमाल: बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियां, बड़ी सरकारी संस्थाएं
- डिफॉल्ट सबनेट मास्क: 255.0.0.0
2. Class B — मध्यम आकार के नेटवर्क के लिए
- पहले octet की रेंज: 128 से 191
- पहले दो octet = Network ID, बाकी दो octet = Host ID
- हर नेटवर्क में लगभग 65,000 होस्ट जुड़ सकते हैं
- इस्तेमाल: यूनिवर्सिटी, बड़े स्कूल, मध्यम कंपनियां
- डिफॉल्ट सबनेट मास्क: 255.255.0.0
3. Class C — छोटे नेटवर्क के लिए (सबसे ज़्यादा इस्तेमाल)
- पहले octet की रेंज: 192 से 223
- पहले तीन octet = Network ID, आखिरी octet = Host ID
- हर नेटवर्क में 254 होस्ट जुड़ सकते हैं
- इस्तेमाल: घर, छोटा ऑफिस, दुकान — इसीलिए ज़्यादातर घरेलू राउटर का IP 192.168.x.x से शुरू होता है
- डिफॉल्ट सबनेट मास्क: 255.255.255.0
4. Class D — मल्टीकास्टिंग के लिए (आम डिवाइस के लिए नहीं)
- पहले octet की रेंज: 224 से 239
- इस्तेमाल: मल्टीकास्टिंग — जब एक संदेश एक साथ कई खास डिवाइसों को भेजना हो (जैसे लाइव वीडियो स्ट्रीमिंग)
- इसमें Network ID/Host ID का बंटवारा नहीं होता
5. Class E — भविष्य के लिए रिज़र्व
- पहले octet की रेंज: 240 से 255
- इस्तेमाल: रिसर्च और भविष्य के प्रयोग के लिए सुरक्षित रखी गई है; आम इस्तेमाल में नहीं आती
| क्लास | पहले Octet की रेंज | Network ID | Host ID | इस्तेमाल |
|---|---|---|---|---|
| A | 1 – 126 | पहला octet | बाकी 3 octet | बहुत बड़े नेटवर्क |
| B | 128 – 191 | पहले 2 octet | बाकी 2 octet | मध्यम नेटवर्क |
| C | 192 – 223 | पहले 3 octet | आखिरी octet | छोटे नेटवर्क (घर/ऑफिस) |
| D | 224 – 239 | — | — | मल्टीकास्टिंग |
| E | 240 – 255 | — | — | रिसर्च के लिए रिज़र्व |
खास नोट: 127 से शुरू होने वाले एड्रेस (जैसे 127.0.0.1) किसी क्लास में नहीं गिने जाते — ये loopback के लिए रिज़र्व हैं (आगे localhost वाले भाग में विस्तार से)।
याद रखने की ट्रिक: रेंज को क्रम से याद करो — “1-126, 128-191, 192-223, 224-239, 240-255″। ध्यान दो कि 127 बीच में छूटा है — वही loopback है। परीक्षा में “127 किस क्लास में है?” पूछा जाए तो जवाब है: किसी में नहीं, यह loopback के लिए है।
Subnet Mask क्या है?
Subnet Mask एक 32-बिट का नंबर होता है जो बताता है कि IP Address में कौन-सा हिस्सा Network ID है और कौन-सा Host ID है। यह खुद कोई पता नहीं होता, बल्कि IP Address को पढ़ने का “पैमाना” होता है।
Subnet Mask में Network ID वाले बिट हमेशा 1 होते हैं और Host ID वाले बिट हमेशा 0 होते हैं। जैसे:
- 255.255.255.0 — पहले 24 बिट 1 हैं (तीन octet पूरे भरे), आखिरी 8 बिट 0 हैं। इसका मतलब: पहले तीन octet Network ID, आखिरी octet Host ID। यह Class C का डिफॉल्ट मास्क है।
- 255.255.0.0 — पहले 16 बिट 1 हैं। यह Class B का डिफॉल्ट मास्क है।
- 255.0.0.0 — पहले 8 बिट 1 हैं। यह Class A का डिफॉल्ट मास्क है।
उदाहरण: अगर किसी डिवाइस का IP 192.168.1.10 है और Subnet Mask 255.255.255.0 है, तो Network ID = 192.168.1 और Host ID = 10। मास्क ने बता दिया कि कहां बंटवारा है।
बड़े नेटवर्क को छोटे-छोटे हिस्सों (subnet) में बांटने की प्रक्रिया को subnetting कहते हैं। इससे एड्रेस का सही इस्तेमाल होता है और नेटवर्क सुरक्षित भी रहता है।
Static IP बनाम Dynamic IP
IP Address मिलने के तरीके के आधार पर दो प्रकार होते हैं:
| विशेषता | Static IP | Dynamic IP |
|---|---|---|
| मतलब | हमेशा एक जैसा रहने वाला, पहले से तय IP | हर बार बदल सकने वाला, अपने-आप मिलने वाला IP |
| कैसे मिलता है | हाथ से (manually) सेट किया जाता है | DHCP सर्वर अपने-आप देता है |
| इस्तेमाल | वेब सर्वर, ईमेल सर्वर, बड़ी कंपनियों के सर्वर | घर के डिवाइस, मोबाइल, आम यूज़र |
| फायदा | हमेशा एक ही पते पर मिलता है — सर्वर के लिए ज़रूरी | प्रबंधन आसान, एड्रेस की बचत |
| नुकसान | हाथ से प्रबंधन करना पड़ता है | पता बदल सकता है, सर्वर के लिए ठीक नहीं |
DHCP का पूरा नाम Dynamic Host Configuration Protocol है — यही वह व्यवस्था है जो आपके घर के राउटर से जुड़ते ही फोन या लैपटॉप को अपने-आप IP दे देती है। परीक्षा में DHCP का पूरा नाम पूछा जाता है।
Public IP बनाम Private IP
- Public IP: वह IP जो इंटरनेट पर सीधे दिखता है और दुनिया में अनोखा होता है। आपका राउटर इंटरनेट से Public IP पर जुड़ता है।
- Private IP: वह IP जो सिर्फ आपके घर या ऑफिस के अंदरूनी नेटवर्क में इस्तेमाल होता है। जैसे 192.168.1.1, 10.0.0.1 — ये लाखों घरों में एक जैसे हो सकते हैं, क्योंकि ये इंटरनेट पर सीधे नहीं दिखते।
Private IP की तीन रिज़र्व रेंज हैं (परीक्षा में पूछी जाती हैं):
- 10.0.0.0 से 10.255.255.255 (Class A रेंज)
- 172.16.0.0 से 172.31.255.255 (Class B रेंज)
- 192.168.0.0 से 192.168.255.255 (Class C रेंज)
राउटर अंदरूनी Private IP और बाहरी Public IP के बीच अनुवाद करता है — इस प्रक्रिया को NAT (Network Address Translation) कहते हैं।
Localhost और 127.0.0.1 क्या है?
127.0.0.1 एक खास IP Address है जिसे localhost कहते हैं। जब कोई कंप्यूटर इस पते पर डेटा भेजता है, तो वह डेटा इंटरनेट पर कहीं नहीं जाता — वह उसी कंप्यूटर को वापस मिल जाता है। इसे loopback address कहते हैं।
इसका इस्तेमाल:
- डेवलपर अपने ही कंप्यूटर पर वेबसाइट या सर्वर चलाकर टेस्ट करते हैं — ब्राउज़र में localhost या 127.0.0.1 लिखने पर अपनी ही मशीन का सर्वर खुलता है।
- नेटवर्क की जांच के लिए — अगर localhost काम कर रहा है, तो कंप्यूटर का नेटवर्क सिस्टम ठीक है।
परीक्षा टिप: “127.0.0.1 किसे कहते हैं?” — जवाब: localhost / loopback address। और “127 किस IP क्लास में आता है?” — जवाब: किसी में नहीं, यह loopback के लिए रिज़र्व है।
परीक्षा में पूछे जाने वाले खास बिंदु
- IP का पूरा नाम: Internet Protocol Address
- IPv4 = 32 बिट, 4 octet, दशमलव, बिंदु से अलग; IPv6 = 128 बिट, 8 हिस्से, हेक्साडेसिमल, कोलन से अलग
- IPv4 में लगभग 4.3 अरब एड्रेस; IPv6 में 2^128 एड्रेस
- IP की 5 क्लासेज: A (1-126), B (128-191), C (192-223), D (224-239, मल्टीकास्ट), E (240-255, रिज़र्व)
- IPv6 में कोई क्लास नहीं होती
- हर IP के दो भाग: Network ID और Host ID
- Subnet Mask बताता है कि Network ID कहां खत्म और Host ID कहां शुरू होता है
- DHCP का पूरा नाम: Dynamic Host Configuration Protocol — अपने-आप IP बांटता है
- 127.0.0.1 = localhost (loopback address)
- घरेलू राउटर ज़्यादातर 192.168.x.x (Class C, Private IP) इस्तेमाल करते हैं
- Class D = मल्टीकास्टिंग, Class E = रिसर्च के लिए रिज़र्व
- NAT का पूरा नाम: Network Address Translation
आम गलतियां: IPv4 और IPv6 के बिट उल्टा याद कर लेना (32 बनाम 128); 127 को Class A समझ लेना (वह loopback है); Class D को आम डिवाइस के लिए समझ लेना (वह मल्टीकास्ट के लिए है); Subnet Mask को IP Address समझ लेना (वह सिर्फ बंटवारा बताने वाला पैमाना है)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
IP Address क्या है? Internet Protocol Address — नेटवर्क से जुड़े हर डिवाइस की अनोखी पहचान, जिसके बिना डेटा सही जगह नहीं पहुंच सकता।
IPv4 और IPv6 में क्या अंतर है? IPv4 32-बिट का दशमलव एड्रेस है (जैसे 192.168.1.1) जिससे 4.3 अरब एड्रेस बनते हैं; IPv6 128-बिट का हेक्साडेसिमल एड्रेस है (जैसे 2001:db8::1) जिससे практически असीमित एड्रेस बनते हैं।
IP Address की कितनी क्लास होती हैं? पांच — A, B, C, D और E। ये सिर्फ IPv4 में हैं; IPv6 में कोई क्लास नहीं होती।
127.0.0.1 क्या है? localhost या loopback address — इस पर भेजा डेटा उसी कंप्यूटर को वापस मिलता है। इसका इस्तेमाल टेस्टिंग में होता है।
मेरा IP Address कैसे पता करूं? अपने डिवाइस की नेटवर्क सेटिंग में देखा जा सकता है, या ब्राउज़र में “what is my IP” खोजने पर Public IP दिख जाता है।
Static और Dynamic IP में क्या फर्क है? Static IP हमेशा एक जैसा रहता है (सर्वर के लिए), Dynamic IP हर बार बदल सकता है और DHCP सर्वर अपने-आप देता है (आम यूज़र के लिए)।
Last Updated: 19 अक्टूबर 2026