Printer Ke Prakar: Inkjet, Laser, Dot Matrix [2026]

आपने कभी ATM से निकली पर्ची देखी है — वह पतली, हल्की गर्म कागज़ की पर्ची? और कभी किसी दफ्तर में मोटी रिपोर्ट का साफ-सुथरा प्रिंट? दोनों प्रिंटर से छपते हैं, लेकिन दोनों के प्रिंटर बिल्कुल अलग तकनीक पर काम करते हैं। प्रिंटर भी कई प्रकार के होते हैं — कुछ कागज़ पर चोट करके छापते हैं, तो कुछ बिना छुए ही स्याही बिछा देते हैं।

SSC, बैंक, रेलवे, CTET, UPSC — हर परीक्षा में प्रिंटर से प्रश्न पूछे जाते हैं: “इम्पैक्ट प्रिंटर कौन-सा है?”, “लेज़र प्रिंटर में क्या इस्तेमाल होता है?”, “ATM की पर्ची किस प्रिंटर से निकलती है?” इस विस्तृत गाइड में हर प्रिंटर का काम करने का तरीका, दो बड़ी तुलना तालिकाएं, DPI-PPM जैसे स्पेसिफिकेशन, सही प्रिंटर चुनने की गाइड, परीक्षा की ट्रिक और अभ्यास प्रश्न दिए गए हैं।

इस पेज में:

प्रिंटर क्या है?

प्रिंटर एक आउटपुट डिवाइस है जो कंप्यूटर के डिजिटल डेटा (टेक्स्ट, चित्र, ग्राफ) को कागज़ या अन्य माध्यम पर छापकर भौतिक रूप देता है। जब आप Word में टाइप करके “Print” दबाते हैं, तो स्क्रीन के अक्षर कागज़ पर उतर आते हैं — यही प्रिंटर का काम है। प्रिंटर को हार्ड कॉपी डिवाइस भी कहते हैं, क्योंकि यह सॉफ्ट (स्क्रीन) जानकारी की कठोर/स्थायी प्रति बनाता है।

प्रिंटर का इतिहास दिलचस्प है: सबसे पहले टाइपराइटर (1868) आया, फिर 1950 के दशक में कंप्यूटर के साथ लाइन प्रिंटर, 1970 में डॉट मैट्रिक्स, 1976 में इंकजेट, 1984 में लेज़र प्रिंटर (HP LaserJet) — और आज 3D प्रिंटर प्लास्टिक की चीज़ें तक “छाप” देता है। परीक्षा में “पहला लेज़र प्रिंटर” पूछा जाए तो उत्तर है — HP LaserJet (1984)।

दो मुख्य वर्ग: इम्पैक्ट vs नॉन-इम्पैक्ट

सभी प्रिंटरों को सबसे पहले दो बड़े वर्गों में बांटा जाता है — यह वर्गीकरण परीक्षा में सबसे ज्यादा पूछा जाता है:

1. इम्पैक्ट प्रिंटर (Impact Printer): इसमें प्रिंट हेड कागज़ पर चोट (impact/प्रहार) करके छापता है — बिल्कुल टाइपराइटर की तरह। स्याही लगे रिबन पर हथौड़ी या पिन टकराती है, और अक्षर कागज़ पर उभरता है। पहचान: शोर करता है, गति धीमी, लेकिन कार्बन कॉपी (एक साथ कई प्रतियां) निकाल सकता है। उदाहरण: डॉट मैट्रिक्स, डेज़ी व्हील, लाइन प्रिंटर।

2. नॉन-इम्पैक्ट प्रिंटर (Non-Impact Printer): इसमें प्रिंट हेड कागज़ को छूता ही नहीं — स्याही की फुहार, लेज़र किरण या गर्मी से छपाई होती है। पहचान: शांत चलता है, तेज़ और साफ छपाई, लेकिन कार्बन कॉपी नहीं निकाल सकता। उदाहरण: इंकजेट, लेज़र, थर्मल, 3D प्रिंटर।

आधार इम्पैक्ट प्रिंटर नॉन-इम्पैक्ट प्रिंटर
सिद्धांत कागज़ पर प्रहार करके बिना छुए (स्याही/लेज़र/गर्मी से)
शोर ज्यादा (खटर-पटर) कम (शांत)
गति धीमी तेज़
क्वालिटी मध्यम उच्च (शार्प)
कार्बन कॉपी हां (एक साथ कई प्रतियां) नहीं
उदाहरण डॉट मैट्रिक्स, डेज़ी व्हील, लाइन इंकजेट, लेज़र, थर्मल, 3D

याद रखने की ट्रिक: “इम्पैक्ट = इम्पैक्ट (चोट)” — जिसमें चोट लगे वह इम्पैक्ट। शोर सुनाई दे तो इम्पैक्ट, शांति हो तो नॉन-इम्पैक्ट।

डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर

डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर सबसे प्रसिद्ध इम्पैक्ट प्रिंटर है। इसमें प्रिंट हेड में छोटी-छोटी पिनों (9, 18 या 24) का जाल (मैट्रिक्स) होता है। ये पिनें स्याही लगे रिबन पर तेज़ी से टकराती हैं, और कागज़ पर बिंदुओं (dots) का पैटर्न बनता है — इन्हीं बिंदुओं से अक्षर और चित्र बनते हैं। इसीलिए नाम है “डॉट मैट्रिक्स” — बिंदुओं का जाल।

कैसे काम करता है (चरण):

  1. प्रिंट हेड कागज़ के सामने दाएं-बाएं तेज़ी से घूमता है।
  2. जहां बिंदु चाहिए, वहां इलेक्ट्रोमैग्नेट पिन को आगे धकेलता है।
  3. पिन स्याही-रिबन से टकराकर कागज़ पर एक बिंदु छोड़ती है।
  4. हज़ारों बिंदु मिलकर अक्षर बनाते हैं — 24-पिन वाला ज्यादा साफ छापता है।

विशेषताएं:

  • फायदा: सस्ता, मजबूत, कार्बन कॉपी निकाल सकता है — बैंक, रेलवे, दफ्तरों के बिल में आज भी चलता है।
  • नुकसान: शोर बहुत, गति धीमी (30-600 अक्षर/सेकंड), प्रिंट क्वालिटी मध्यम।
  • पहचान: छपे अक्षरों को पास से देखो — छोटे-छोटे बिंदु दिखेंगे।
  • उपयोग: रेलवे टिकट, बैंक पासबुक, बिजली का बिल, लॉजिस्टिक लेबल।

परीक्षा पॉइंट: “डॉट मैट्रिक्स कैसा प्रिंटर है?” — उत्तर: इम्पैक्ट, कैरेक्टर प्रिंटर। “इसमें कितनी पिन होती हैं?” — उत्तर: 9, 18 या 24।

डेज़ी व्हील प्रिंटर

डेज़ी व्हील प्रिंटर भी इम्पैक्ट प्रिंटर है, लेकिन इसका डिज़ाइन अनोखा है — इसमें अक्षर एक गुलेल (daisy) के फूल जैसी चकरी पर लगे होते हैं। “डेज़ी” यानी गुलबहार का फूल — चकरी की पंखुड़ियों पर A, B, C… अक्षर उभरे होते हैं। छपाई के समय चकरी घूमकर सही अक्षर को हथौड़ी के सामने लाती है, हथौड़ी रिबन पर मारती है, और अक्षर छप जाता है — बिल्कुल टाइपराइटर जैसा।

  • फायदा: अक्षर बहुत साफ और सुंदर छपते थे — लेटर क्वालिटी प्रिंटिंग कहलाती थी।
  • नुकसान: बहुत धीमा (10-75 अक्षर/सेकंड), सिर्फ टेक्स्ट छाप सकता था — चित्र या ग्राफिक्स नहीं।
  • स्थिति: अब लगभग बंद — इंकजेट-लेज़र ने जगह ले ली।

परीक्षा पॉइंट: “डेज़ी व्हील कैसा प्रिंटर है?” — उत्तर: इम्पैक्ट, लेटर-क्वालिटी। “इसमें चित्र क्यों नहीं छपते?” — क्योंकि अक्षर पहले से ढले होते हैं।

लाइन प्रिंटर (ड्रम और चेन प्रिंटर)

लाइन प्रिंटर इम्पैक्ट प्रिंटरों में सबसे तेज़ है — यह एक-एक अक्षर नहीं, बल्कि पूरी लाइन एक बार में छापता है। 1950-80 के दशक में बड़े कंप्यूटर केंद्रों में हज़ारों पेज की रिपोर्टें इसी से छपती थीं। इसके दो मुख्य प्रकार हैं:

1. ड्रम प्रिंटर: एक घूमते हुए बेलन (drum) पर अक्षरों की पंक्तियां उभरी होती हैं। बेलन घूमता है, और सही अक्षर के सामने हथौड़ियां एक साथ रिबन पर मारती हैं — पूरी लाइन एक झटके में छप जाती है। गति: 300-3000 लाइन प्रति मिनट।

2. चेन/बैंड प्रिंटर: अक्षर एक घूमती चेन या स्टील बैंड पर लगे होते हैं। सिद्धांत ड्रम जैसा ही, लेकिन चेन बदलना आसान था — अलग भाषा के अक्षर चाहिए तो चेन बदल दो।

  • फायदा: इम्पैक्ट वर्ग में सबसे तेज़; बड़ी रिपोर्टों के लिए आदर्श।
  • नुकसान: बहुत शोर, क्वालिटी मध्यम, आकार बड़ा।
  • उपयोग: पुराने डेटा सेंटर, बिजली-पानी के बल्क बिल।

परीक्षा पॉइंट: “सबसे तेज़ इम्पैक्ट प्रिंटर?” — उत्तर: लाइन प्रिंटर। “पूरी लाइन एक बार में कौन छापता है?” — उत्तर: लाइन प्रिंटर।

इंकजेट प्रिंटर

इंकजेट प्रिंटर सबसे लोकप्रिय नॉन-इम्पैक्ट प्रिंटर है — घरों और छोटे दफ्तरों में यही सबसे ज्यादा दिखता है। इसमें कार्ट्रिज में तरल स्याही (liquid ink) भरी होती है, और प्रिंट हेड के सूक्ष्म नोज़ल से स्याही की बूंदें कागज़ पर फुहार के रूप में गिरती हैं — कागज़ को छुए बिना। “इंकजेट” का अर्थ ही है — स्याही की फुहार।

कैसे काम करता है: दो तकनीकें हैं — थर्मल (बबल जेट): नोज़ल में स्याही को गर्म करके भाप का बुलबुला बनाया जाता है, जो बूंद को बाहर धकेलता है (HP, Canon); पीज़ोइलेक्ट्रिक: क्रिस्टल में बिजली देकर उसे सिकोड़ा जाता है, दबाव से बूंद निकलती है (Epson) — ज्यादा सटीक।

विशेषताएं:

  • फायदा: सस्ता प्रिंटर, रंगीन छपाई बढ़िया (फोटो तक), शांत।
  • नुकसान: स्याही महंगी पड़ती है (प्रति पेज लागत ज्यादा), लंबे समय न चलाओ तो नोज़ल सूखकर बंद हो जाते हैं, छपाई पानी में फैल सकती है।
  • गति: 10-30 पेज प्रति मिनट (PPM)।
  • उपयोग: घर, स्कूल प्रोजेक्ट, फोटो प्रिंटिंग।

परीक्षा पॉइंट: “इंकजेट कैसा प्रिंटर है?” — उत्तर: नॉन-इम्पैक्ट। “इसमें स्याही कैसी होती है?” — उत्तर: तरल (liquid ink)।

लेज़र प्रिंटर

लेज़र प्रिंटर नॉन-इम्पैक्ट प्रिंटरों का राजा है — सबसे तेज़, सबसे साफ छपाई। यह लेज़र किरण और सूखे पाउडर (टोनर) से छापता है, तरल स्याही से नहीं। काम करने का तरीका फोटोकॉपी मशीन जैसा है — इसीलिए इसे समझना आसान है।

कैसे काम करता है (6 चरण — परीक्षा में पूछा जाता है):

  1. चार्जिंग: घूमते ड्रम पर बिजली का चार्ज चढ़ता है।
  2. एक्सपोज़र: लेज़र किरण ड्रम पर अक्षरों की तस्वीर “लिखती” है — जहां लिखना है वहां चार्ज हट जाता है।
  3. डेवलपिंग: सूखा टोनर पाउडर चार्ज हटे हिस्सों से चिपकता है।
  4. ट्रांसफर: कागज़ ड्रम से रगड़ खाकर टोनर अपने ऊपर ले लेता है।
  5. फ्यूज़िंग: गर्म रोलर (200°C) टोनर को कागज़ में पिघलाकर पक्का करता है — इसीलिए ताज़ा प्रिंट गर्म निकलता है!
  6. सफाई: ड्रम साफ होकर अगले चक्र के लिए तैयार।

विशेषताएं:

  • फायदा: सबसे तेज़ (20-60 PPM), सबसे शार्प टेक्स्ट, प्रति पेज सस्ता (ज्यादा छपाई पर), टोनर सूखता नहीं।
  • नुकसान: प्रिंटर महंगा, रंगीन लेज़र और महंगा, बिजली ज्यादा खाता है।
  • उपयोग: दफ्तर, बैंक, परीक्षा केंद्र — जहां रोज़ सैकड़ों पेज छपते हैं।

परीक्षा पॉइंट: “लेज़र प्रिंटर में क्या इस्तेमाल होता है?” — उत्तर: लेज़र बीम + टोनर (सूखा पाउडर)। “ताज़ा प्रिंट गर्म क्यों निकलता है?” — उत्तर: फ्यूज़िंग में गर्म रोलर। “पहला लेज़र प्रिंटर?” — उत्तर: HP LaserJet (1984)।

थर्मल प्रिंटर

थर्मल प्रिंटर गर्मी (heat) से छापता है — इसमें स्याही या टोनर होता ही नहीं! यह खास थर्मल पेपर (गर्मी से काला पड़ने वाला कागज़) पर गर्म प्रिंट हेड से लिखता है। “थर्मल” का अर्थ है — ऊष्मीय।

  • पहचान: ATM की पर्ची, शॉपिंग बिल, बस-रेल टिकट — वह पतली, चिकनी, हल्की गर्म पर्ची थर्मल प्रिंटर की है।
  • फायदा: बहुत छोटा, सस्ता, शांत, स्याही-टोनर का झंझट नहीं — इसीलिए हर दुकान-ATM में है।
  • नुकसान: छपाई फीकी पड़ जाती है (धूप में रखो तो मिट जाती है), सिर्फ खास कागज़ पर चलता है, रंगीन नहीं।
  • टिकट-पर्ची टेस्ट: नाखून से पर्ची पर खरोंचो — काली लाइन बने तो थर्मल पेपर है!

परीक्षा पॉइंट: “ATM की पर्ची किस प्रिंटर से निकलती है?” — उत्तर: थर्मल प्रिंटर। “थर्मल प्रिंटर में स्याही होती है?” — उत्तर: नहीं, गर्मी से छपता है।

3D प्रिंटर

3D प्रिंटर कागज़ पर नहीं, बल्कि असली त्रि-आयामी वस्तुएं “छापता” है — जैसे खिलौने, मशीन के पुर्जे, यहां तक कि कृत्रिम हड्डी! यह प्लास्टिक के तार (फिलामेंट) को पिघलाकर परत-दर-परत जमाता है, जब तक पूरी चीज़ बन न जाए। इसे एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग कहते हैं — जोड़-जोड़कर बनाना (काटकर नहीं)।

  • उपयोग: कार-कंपनी प्रोटोटाइप, डॉक्टरों के लिए कृत्रिम अंग, आर्किटेक्ट के मॉडल, अंतरिक्ष में पुर्जे बनाना।
  • भारत में: IITs और मेडिकल कॉलेजों में 3D प्रिंटर से सर्जरी की तैयारी होती है।
  • भविष्य: घर, कपड़े, यहां तक कि खाना भी 3D प्रिंट हो रहा है!

परीक्षा पॉइंट: “3D प्रिंटर क्या बनाता है?” — उत्तर: त्रि-आयामी वस्तुएं (परत-दर-परत)। तकनीक का नाम: एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग।

प्लॉटर क्या है?

प्लॉटर प्रिंटर का बड़ा भाई है — यह बहुत बड़े आकार (नक्शे, बिल्डिंग के नक्शे, बैनर) की छपाई करता है। आम प्रिंटर A4-A3 तक सीमित है, लेकिन प्लॉटर मीटरों लंबे कागज़ पर छाप सकता है। पुराने प्लॉटर में कलम (pen) कागज़ पर चलकर लाइनें खींचती थीं — इसीलिए इन्हें “प्लॉटर” (रेखा खींचने वाला) कहते हैं।

  • उपयोग: आर्किटेक्ट के बिल्डिंग प्लान, इंजीनियर के नक्शे, विज्ञापन के बड़े बैनर, भौगोलिक मानचित्र।
  • प्रकार: ड्रम प्लॉटर (कागज़ घूमता है), फ्लैटबेड प्लॉटर (कलम घूमती है)।
  • अंतर: प्रिंटर = छोटे पेज, तेज़; प्लॉटर = बड़े आकार, सटीक लाइनें।

परीक्षा पॉइंट: “बड़े नक्शे-बैनर कौन छापता है?” — उत्तर: प्लॉटर।

सभी प्रिंटरों की तुलना तालिका

प्रिंटर वर्ग तकनीक गति क्वालिटी मुख्य उपयोग
डॉट मैट्रिक्स इम्पैक्ट पिन + रिबन धीमी मध्यम टिकट, बिल, पासबुक
डेज़ी व्हील इम्पैक्ट अक्षर-चकरी + हथौड़ी बहुत धीमी साफ (टेक्स्ट) पुराने पत्र (अब बंद)
लाइन प्रिंटर इम्पैक्ट ड्रम/चेन, पूरी लाइन तेज़ (इम्पैक्ट में) मध्यम बल्क रिपोर्ट
इंकजेट नॉन-इम्पैक्ट तरल स्याही की फुहार मध्यम अच्छी (रंगीन) घर, फोटो
लेज़र नॉन-इम्पैक्ट लेज़र + टोनर पाउडर सबसे तेज़ सबसे शार्प दफ्तर, बल्क प्रिंटिंग
थर्मल नॉन-इम्पैक्ट गर्मी (स्याही नहीं) तेज़ अस्थायी ATM, दुकान बिल
3D प्रिंटर नॉन-इम्पैक्ट परत-दर-परत प्लास्टिक धीमी — (वस्तु) प्रोटोटाइप, चिकित्सा
प्लॉटर नॉन-इम्पैक्ट कलम/इंकजेट, बड़ा आकार धीमी सटीक लाइनें नक्शे, बैनर

प्रिंटर स्पेसिफिकेशन: DPI, PPM समझें

प्रिंटर खरीदते समय डिब्बे पर दो नंबर जरूर लिखे होते हैं — DPI और PPM। परीक्षा में भी इनके फुल फॉर्म पूछे जाते हैं:

  • DPI = Dots Per Inch (प्रति इंच बिंदु): एक इंच में कितने बिंदु छपेंगे — यही क्वालिटी बताता है। ज्यादा DPI = ज्यादा शार्प प्रिंट। आम प्रिंटर: 600 DPI; फोटो प्रिंटर: 1200-4800 DPI।
  • PPM = Pages Per Minute (प्रति मिनट पेज): एक मिनट में कितने पेज — यही गति बताता है। इंकजेट: 10-30 PPM; लेज़र: 20-60 PPM।
  • CPS = Characters Per Second: इम्पैक्ट प्रिंटरों की गति — प्रति सेकंड अक्षर। डॉट मैट्रिक्स: 30-600 CPS।
  • LPM = Lines Per Minute: लाइन प्रिंटर की गति — प्रति मिनट लाइनें (300-3000 LPM)।

परीक्षा पॉइंट: DPI = Dots Per Inch (क्वालिटी); PPM = Pages Per Minute (गति)। दोनों के फुल फॉर्म रट लें।

कौन-सा प्रिंटर कब चुनें?

  • घर के लिए: इंकजेट — सस्ता प्रिंटर, रंगीन छपाई, कभी-कभी इस्तेमाल।
  • दफ्तर के लिए: लेज़र — रोज़ सैकड़ों पेज, प्रति पेज सस्ता, तेज़।
  • दुकान/ATM के लिए: थर्मल — छोटा, सस्ता, पर्ची तुरंत।
  • टिकट/बिल (कार्बन कॉपी): डॉट मैट्रिक्स — एक साथ कई प्रतियां।
  • नक्शे/बैनर: प्लॉटर — बड़ा आकार।
  • प्रोटोटाइप/मॉडल: 3D प्रिंटर — असली वस्तु।

परीक्षा में पहचानने की ट्रिक

  • “चोट/प्रहार/रिबन/शोर” दिखे → इम्पैक्ट (डॉट मैट्रिक्स, डेज़ी व्हील, लाइन)।
  • “बिना छुए/शांत/स्याही की फुहार” दिखे → नॉन-इम्पैक्ट (इंकजेट, लेज़र, थर्मल)।
  • “कार्बन कॉपी/एक साथ कई प्रतियां” → सिर्फ इम्पैक्ट कर सकता है।
  • “टोनर/सूखा पाउडर/गर्म रोलर” → लेज़र प्रिंटर।
  • “तरल स्याही/नोज़ल/फुहार” → इंकजेट प्रिंटर।
  • “बिना स्याही/गर्मी/ATM पर्ची” → थर्मल प्रिंटर।
  • “पूरी लाइन एक बार में” → लाइन प्रिंटर।
  • “बिंदुओं से अक्षर” → डॉट मैट्रिक्स।
  • “फूल जैसी चकरी” → डेज़ी व्हील।
  • “परत-दर-परत वस्तु” → 3D प्रिंटर।

आम गलतियां जो छात्र करते हैं

  • गलती 1: “इंकजेट इम्पैक्ट है” — गलत। इंकजेट नॉन-इम्पैक्ट है (कागज़ को छूता नहीं)।
  • गलती 2: “लेज़र में तरल स्याही होती है” — गलत। लेज़र में सूखा टोनर पाउडर होता है; तरल स्याही इंकजेट में।
  • गलती 3: “थर्मल में स्याही होती है” — गलत। थर्मल में स्याही होती ही नहीं — गर्मी से छपता है।
  • गलती 4: “प्लॉटर प्रिंटर नहीं है” — आंशिक गलत। प्लॉटर बड़े आकार का प्रिंटर ही है।
  • गलती 5: “DPI गति बताता है” — गलत। DPI = क्वालिटी, PPM = गति।
  • गलती 6: “सबसे तेज़ प्रिंटर डॉट मैट्रिक्स है” — गलत। सबसे तेज़ लेज़र है; डॉट मैट्रिक्स धीमा है।

अभ्यास प्रश्न (8 MCQs)

नीचे 8 प्रश्न हैं — हर प्रश्न इसी पेज की जानकारी से बना है।

Q1: कौन-सा प्रिंटर इम्पैक्ट प्रिंटर है?
A) इंकजेट   B) लेज़र   C) डॉट मैट्रिक्स   D) थर्मल
उत्तर: C — डॉट मैट्रिक्स पिनों से प्रहार करता है।

Q2: लेज़र प्रिंटर में क्या इस्तेमाल होता है?
A) तरल स्याही   B) टोनर पाउडर   C) रिबन   D) थर्मल पेपर
उत्तर: B — सूखा टोनर + लेज़र बीम।

Q3: ATM की पर्ची किस प्रिंटर से निकलती है?
A) इंकजेट   B) लेज़र   C) डॉट मैट्रिक्स   D) थर्मल
उत्तर: D — गर्मी से छपाई, स्याही नहीं।

Q4: DPI का पूरा नाम क्या है?
A) Dots Per Inch   B) Data Per Input   C) Digital Print Ink   D) Daily Paper Output
उत्तर: A — Dots Per Inch (क्वालिटी बताता है)।

Q5: कार्बन कॉपी कौन-सा प्रिंटर निकाल सकता है?
A) सिर्फ नॉन-इम्पैक्ट   B) सिर्फ इम्पैक्ट   C) दोनों   D) कोई नहीं
उत्तर: B — प्रहार से कई प्रतियां एक साथ (सिर्फ इम्पैक्ट)।

Q6: पूरी लाइन एक बार में कौन-सा प्रिंटर छापता है?
A) डॉट मैट्रिक्स   B) डेज़ी व्हील   C) लाइन प्रिंटर   D) प्लॉटर
उत्तर: C — लाइन प्रिंटर।

Q7: 3D प्रिंटर किस तकनीक पर काम करता है?
A) इम्पैक्ट   B) एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग   C) थर्मल   D) लेज़र बीम
उत्तर: B — परत-दर-परत जोड़कर वस्तु बनाना।

Q8: बड़े नक्शे और बैनर छापने के लिए कौन-सा डिवाइस है?
A) स्कैनर   B) प्लॉटर   C) प्रोजेक्टर   D) मॉनिटर
उत्तर: B — प्लॉटर बड़े आकार की छपाई करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: इम्पैक्ट और नॉन-इम्पैक्ट प्रिंटर में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर: इम्पैक्ट प्रिंटर कागज़ पर प्रहार करके छापता है (शोर, धीमा, कार्बन कॉपी संभव); नॉन-इम्पैक्ट बिना छुए छापता है (शांत, तेज़, साफ)।

प्रश्न: घर के लिए कौन-सा प्रिंटर सबसे अच्छा है?
उत्तर: इंकजेट — सस्ता और रंगीन छपाई के लिए बढ़िया। रोज़ ज्यादा छपाई हो तो लेज़र बेहतर।

प्रश्न: लेज़र प्रिंटर का ताज़ा प्रिंट गर्म क्यों निकलता है?
उत्तर: फ्यूज़िंग चरण में गर्म रोलर टोनर को कागज़ में पिघलाकर पक्का करता है — इसीलिए गर्मी महसूस होती है।

प्रश्न: थर्मल प्रिंटर की छपाई मिट क्यों जाती है?
उत्तर: इसमें स्याही नहीं होती — गर्मी से कागज़ काला पड़ता है। धूप-गर्मी में यह रासायनिक परत फीकी पड़ जाती है।

प्रश्न: डॉट मैट्रिक्स आज भी कहां इस्तेमाल होता है?
उत्तर: रेलवे टिकट, बैंक पासबुक, बिजली के बिल — जहां कार्बन कॉपी और मजबूती चाहिए।

प्रश्न: PPM और DPI में क्या अंतर है?
उत्तर: PPM (Pages Per Minute) गति बताता है; DPI (Dots Per Inch) प्रिंट की क्वालिटी/शार्पनेस बताता है।

Last Updated: 19 अक्टूबर 2026

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top