संधि क्या है: परिभाषा, भेद और ट्रिक

लेखक: अभ्यास नीति | Last Updated: 3 अक्टूबर 2026

संधि दो पास-पास आए वर्णों के मेल से होने वाला परिवर्तन है, जैसे विद्या + आलय = विद्यालय। संधि के तीन भेद हैं: स्वर संधि, व्यंजन संधि और विसर्ग संधि। भेद पहचानने का आसान तरीका है पहले हिस्से के आखिरी वर्ण को देखना। परिभाषा, भेदों का सार, पहचानने के स्टेप, आम गलतियाँ, ट्रिक और 10 प्रश्नों का क्विज़ है।

इस पेज में

संधि किसे कहते हैं

संधि का अर्थ है ‘मेल’। जब दो वर्णों के मेल से उनके मूल रूप में जो परिवर्तन या विकार आ जाता है, वह संधि कहलाता है।

  • नर + ईश = नरेश
  • विद्या + अर्थी = विद्यार्थी

बदलाव हमेशा दो हिस्सों की सीमा पर होता है: पहले हिस्से का आखिरी वर्ण और दूसरे हिस्से का पहला वर्ण आपस में मिलते हैं। संधि वर्णों के स्तर पर होती है: नरेश में सिर्फ अ और ई मिले, न और र वैसे के वैसे रहे। इसलिए संधि पहचानने के लिए सिर्फ दोनों हिस्सों की सीमा वाले दो वर्ण देखने होते हैं।

परिभाषा में ‘विकार’ का अर्थ है वर्ण में आया कोई भी बदलाव, और यह तीन तरह का होता है। वर्ण बदल जाना: सत् + आचार = सदाचार में त् द् में बदला। वर्ण का लोप हो जाना: अतः + एव = अतएव में विसर्ग का लोप हुआ। नया वर्ण जुड़ जाना: ने + अन = नयन में य् जुड़ा।

संधि-विच्छेद क्या है

संधि का अर्थ है मिलना, विच्छेद का अर्थ है अलग होना। दो वर्णों के मेल से बने नए शब्द को वापस पहले की स्थिति में लाना संधि-विच्छेद कहलाता है।

  • विद्यालय = विद्या + आलय
  • सूर्योदय = सूर्य + उदय

जोड़ने और तोड़ने में नियम एक ही, दिशा उल्टी: नर + ईश = नरेश (जोड़ना), नरेश = नर + ईश (तोड़ना)।

जोड़ना (संधि) तोड़ना (विच्छेद)
महा + उत्सव = महोत्सव (आ + उ = ओ) महोत्सव = महा + उत्सव
उत् + चारण = उच्चारण (त् + च = च) उच्चारण = उत् + चारण
निः + चल = निश्चल (ः + च = श्) निश्चल = निः + चल

भेद-वार विच्छेदों की लंबी सूची यहाँ है: संधि विच्छेद के उदाहरण।

संधि के तीन भेद (एक नज़र में)

संधि के तीन भेद होते हैं। भेद इस बात से तय होता है कि पहले हिस्से का आखिरी वर्ण क्या है: स्वर, व्यंजन या विसर्ग।

भेद कब होती है पहचान का संकेत उदाहरण
स्वर संधि दो स्वरों के मेल से आखिरी वर्ण स्वर हो महा + आत्मा = महात्मा
व्यंजन संधि व्यंजन का स्वर या व्यंजन से मेल होने पर आखिरी वर्ण व्यंजन हो जगत् + नाथ = जगन्नाथ
विसर्ग संधि विसर्ग का स्वर या व्यंजन से मेल होने पर आखिरी वर्ण में विसर्ग (ः) हो मनः + रथ = मनोरथ

जैसे: हिमालय (हिम का आखिरी वर्ण अ, स्वर संधि), वागीश (वाक् का आखिरी वर्ण क्, व्यंजन संधि), निर्धन (निः में विसर्ग, विसर्ग संधि)।

स्वर संधि का सार

दो स्वरों के मेल से होने वाले परिवर्तन को स्वर संधि कहते हैं। इसके पाँच भेद हैं: दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण और अयादि।

  • दीर्घ संधि में एक ही स्वर के ह्रस्व या दीर्घ रूप आपस में मिलकर दीर्घ स्वर बनाते हैं। अ + आ = आ → हिम + आलय = हिमालय, देव + आलय = देवालय। आ + आ = आ → विद्या + आलय = विद्यालय।
  • गुण संधि में अ/आ के बाद इ/ई आए तो ए, उ/ऊ आए तो ओ, ऋ आए तो अर् बनता है। नर + ईश = नरेश। महा + उत्सव = महोत्सव। देव + ऋषि = देवर्षि।
  • वृद्धि संधि में अ/आ के बाद ए/ऐ आए तो ऐ, ओ/औ आए तो औ बनता है। सदा + एव = सदैव। एक + एक = एकैक। महा + औषधि = महौषधि।
  • यण संधि में इ/ई के बाद भिन्न स्वर आए तो य्, उ/ऊ के बाद भिन्न स्वर आए तो व्, ऋ के बाद भिन्न स्वर आए तो र् बनता है। अति + अधिक = अत्यधिक। सु + आगत = स्वागत। प्रति + एक = प्रत्येक।
  • अयादि संधि में ए के बाद भिन्न स्वर आए तो अय्, ऐ के बाद आए तो आय्, ओ के बाद आए तो अव्, औ के बाद आए तो आव् बनता है। ने + अक = नायक। भो + अन = भवन। पौ + अक = पावक।

पाँचों भेदों के पूरे नियम, पहचान की तुलना टेबल और और उदाहरण इस पेज पर हैं: स्वर संधि के भेद।

व्यंजन संधि का सार

व्यंजन का व्यंजन से या किसी स्वर से मेल होने पर जो परिवर्तन होता है, वह व्यंजन संधि कहलाता है। इसके मुख्य नियम:

  • वर्ग के पहले वर्ण (क्, च्, ट्, त्, प्) के बाद स्वर, उसी वर्ग का तीसरा-चौथा वर्ण, या य-र-ल-व आए तो पहला वर्ण उसी वर्ग का तीसरा वर्ण बन जाता है। दिक् + अम्बर = दिगम्बर। वाक् + ईश = वागीश।
  • त्/द् के बाद ज/झ → ज (सत् + जन = सज्जन), च/छ → च (उत् + चारण = उच्चारण), ह → द्ध (उत् + हार = उद्धार)।
  • म् के बाद कोई स्पर्श व्यंजन आए तो म् उसी वर्ग का पाँचवाँ वर्ण या अनुस्वार बन जाता है। सम् + तोष = सन्तोष। म् के बाद य, र, ल, व, श, ष, स, ह आए तो म् अनुस्वार बन जाता है। सम् + सार = संसार। अपवाद: सम् + राट् = सम्राट।
  • छ से पहले स्वर हो तो छ से पहले च जुड़ जाता है। परि + छेद = परिच्छेद। आ + छादन = आच्छादन।
  • ष् के बाद त् या थ् आए तो ट् या ठ् बनता है। आकृष् + त = आकृष्ट। ऋ, र या ष के बाद न आए तो ण बनता है। राम + अयन = रामायण।

वर्गों की याद: हर वर्ग का पहला वर्ण क्, च्, ट्, त्, प्; तीसरा ग्, ज्, ड्, द्, ब्; पाँचवाँ ङ्, ञ्, ण्, न्, म्।

व्यंजन संधि के सारे नियम और उदाहरणों की पूरी सूची इस पेज पर हैं: व्यंजन और विसर्ग संधि।

विसर्ग संधि का सार

विसर्ग का किसी स्वर या व्यंजन से मेल होने पर जो परिवर्तन होता है, वह विसर्ग संधि कहलाता है। इसके मुख्य नियम:

  • विसर्ग से पहले अ हो और बाद में घोष व्यंजन या य-र-ल-व-ह हो तो विसर्ग ओ बन जाता है। मनः + बल = मनोबल। मनः + रथ = मनोरथ।
  • विसर्ग से पहले अ-आ को छोड़कर कोई दूसरा स्वर हो और बाद में स्वर या घोष व्यंजन हो तो विसर्ग र् बन जाता है। निः + बल = निर्बल। निः + आशा = निराशा।
  • विसर्ग के बाद च/छ आए तो श्, ट/ठ आए तो ष्, त/थ आए तो स् बनता है। निः + चिंत = निश्चित। नमः + ते = नमस्ते। मनः + ताप = मनस्ताप।
  • विसर्ग से पहले इ/उ हो और बाद में क, ख, प, फ हो तो विसर्ग ष् बन जाता है। निः + कपट = निष्कपट। दुः + कर = दुष्कर।
  • विसर्ग से पहले इ/उ हो और बाद में र आए तो विसर्ग का लोप होकर ह्रस्व स्वर दीर्घ हो जाता है। निः + रस = नीरस। विसर्ग से पहले अ हो और बाद में अ को छोड़कर कोई स्वर आए तो भी विसर्ग का लोप होता है। अतः + एव = अतएव।
  • विसर्ग के बाद क, ख, प, फ हो तो विसर्ग में कोई बदलाव नहीं होता। प्रातः + काल = प्रातःकाल।
  • विसर्ग के बाद श, ष या स आए तो विसर्ग वैसा ही रहता है या अगले वर्ण में बदल जाता है। निः + संदेह = निस्संदेह (या निःसंदेह)।

नियमों का पूरा विवरण और उदाहरणों की सूची यहाँ है: व्यंजन और विसर्ग संधि।

संधि पहचानने के 4 स्टेप

जुड़े हुए शब्द का भेद इन चार स्टेप से निकाला जा सकता है।

  1. शब्द को दो हिस्सों में तोड़ो। महोत्सव → महा + उत्सव।
  2. पहले हिस्से के आखिरी वर्ण को देखो: स्वर, व्यंजन या विसर्ग। यही स्टेप भेद तय करता है।
  3. आखिरी वर्ण और दूसरे हिस्से के पहले वर्ण का मेल देखो। आ + उ = ओ, यह गुण संधि का नियम है।
  4. परिणाम को मूल शब्द से मिलाओ। महोत्सव मिल गया, तो भेद पक्का: स्वर संधि (गुण संधि)।

सदाचार: (1) तोड़ो → सत् + आचार। (2) आखिरी वर्ण त् (व्यंजन)। (3) त् + आ = दा; त वर्ग का पहला वर्ण तीसरे में बदला, व्यंजन संधि। (4) जोड़कर देखो → सदाचार।

स्वागत: (1) तोड़ो → सु + आगत। (2) आखिरी वर्ण उ (स्वर)। (3) उ + आ = वा; उ व् में बदला, यण संधि। (4) जोड़कर देखो → स्वागत। भेद पक्का: स्वर संधि (यण संधि)।

एक सावधानी: भेद हमेशा मूल हिस्से के आखिरी वर्ण से तय होता है, बदले हुए रूप से नहीं। मनोरथ में “र” देखकर नहीं, विच्छेद मनः + रथ से (विसर्ग संधि); वागीश में “ग” देखकर नहीं, विच्छेद वाक् + ईश से (व्यंजन संधि)।

संधि-विच्छेद करने की ट्रिक

विच्छेद जोड़ने का उल्टा काम है: जहाँ वर्ण बदले हैं, वहीं से खोलना शुरू करो।

  1. बदलाव वाली जगह खोजो। जुड़े शब्द में वह जगह देखो जहाँ मात्रा, हलंत, विसर्ग या दोहरा वर्ण दिखे। वही मेल की जगह है: विद्यालय में “ा” मात्रा, जगन्नाथ में “न्न”, मनोरथ में छिपा विसर्ग।
  2. परिवर्तन को उल्टा खोलो। दीर्घ मात्रा दो एक जैसे स्वरों से, ए/ओ/ऐ/औ की मात्रा अ/आ + बाद वाले स्वर से बनती है। दोहरा व्यंजन दो मूल वर्णों का मेल है।
  3. दो हिस्से बनाकर नियम से मिलाओ। खोले हुए वर्णों से दो हिस्से बनाओ और देखो कौन-सा संधि-नियम लगा था। नियम मिल जाए तो विच्छेद सही है।
  4. जोड़कर जाँचो। विच्छेद के दोनों हिस्सों को नियम से जोड़ो। मूल शब्द बन जाए तो विच्छेद पक्का; न बने तो तोड़ गलत है।

हल किए गए उदाहरण:

  • विद्यालय = विद्या + आलय (आ + आ = आ, दीर्घ)।
  • नरेश = नर + ईश (अ + ई = ए, गुण)।
  • जगन्नाथ = जगत् + नाथ (त् + न, व्यंजन)। त् का हलंत वापस लाओ।
  • मनोरथ = मनः + रथ (अ + ः + र → ओ, विसर्ग)।
  • नयन = ने + अन (ए + अ = अय्, अयादि)।

छिपे बदलाव: वागीश → वाक् + ईश, दिगम्बर → दिक् + अम्बर, सज्जन → सत् + जन।

तोड़ सार्थक हिस्सों में करो: महा + उत्सव सही, “महो + त्सव” गलत।

यह ट्रिक उन्हीं शब्दों पर काम करती है जिनमें संधि हुई हो। “कमल” या “घर” जैसे शब्दों में कोई मेल नहीं हुआ, इसलिए इनका विच्छेद नहीं होता।

बदले रूप से मूल वर्ण तक का उल्टा चार्ट:

बदला रूप मूल वर्ण
ा (आ) अ/आ + अ/आ
े (ए) अ/आ + इ/ई
ो (ओ) अ/आ + उ/ऊ
ै (ऐ) अ/आ + ए/ऐ
ौ (औ) अ/आ + ओ/औ
न्न, च्छ, ज्ज त्/द् + न/छ/ज
ं म्
ग्, द् (बदला) क्, त्
श्, स् (विसर्ग से) ः + च/त
ओ, र् (विसर्ग से) अ/इ + ः

इस चार्ट से विच्छेद दो चरण में होता है: बदला रूप पहचानो, मूल वर्ण रखो।

आम गलतियाँ

  1. गुण को वृद्धि समझना। नरेश (नर + ईश, अ + ई = ए) गुण संधि है; सदैव (सदा + एव, आ + ए = ऐ) वृद्धि। ए/ओ गुण, ऐ/औ वृद्धि।
  2. विच्छेद में मात्रा छोड़ देना। विद्यालय = विद्या + आलय; “विद्या + लय” गलत।
  3. संधि और समास को एक मानना। संधि वर्णों का मेल है (देव + आलय = देवालय), समास पदों का मेल है। फर्क यहाँ: समास।
  4. विसर्ग को न पहचानना। मनोबल = मनः + बल, यह विसर्ग संधि है, व्यंजन संधि नहीं।
  5. स्वागत में गुण बताना। सु + आगत में उ व् में बदला, यह यण संधि है।
  6. सदाचार में स्वर संधि बताना। सत् + आचार में त् द् में बदला; भेद पहले हिस्से के आखिरी वर्ण (व्यंजन) से तय होता है।
  7. ओ की मात्रा देखकर भेद बताना। महोत्सव में ओ अ + उ से (गुण), मनोरथ में ओ अ + ः से (विसर्ग)। मात्रा एक जैसी, मूल वर्ण अलग।

याद रखने की ट्रिक

  • यण का क्रम: इ/ई → य्, उ/ऊ → व्, ऋ → र् (“य, व, र”)।
  • गुण बनाम वृद्धि: छोटा परिणाम (ए, ओ) गुण, बड़ा (ऐ, औ) वृद्धि।
  • पहचान की चाबी: आखिरी वर्ण देखो: स्वर → स्वर संधि, व्यंजन → व्यंजन संधि, विसर्ग → विसर्ग संधि।
  • पाँचों भेद एक पंक्ति में: दीर्घ लंबा (आ, ई, ऊ), गुण छोटा (ए, ओ), वृद्धि बड़ा (ऐ, औ), यण बदला (य्, व्, र्), अयादि जुड़ा (अय्, आय्, अव्, आव्)।
  • अपवाद: सम् + राट् = सम्राट (म् अनुस्वार नहीं बनता)।
  • विसर्ग के तीन रास्ते: अ से पहले → ओ (मनोरथ), इ/उ से पहले → र्/ष् (निर्बल, निष्कपट), च-ट-त वर्ग से पहले → श्/ष्/स् (निश्चित)।
  • मात्रा से फर्क: ए/ओ → गुण, ऐ/औ → वृद्धि, आ/ई/ऊ → दीर्घ।

हिंदी व्याकरण के बाकी टॉपिक इस हब पेज पर मिलेंगे: हिंदी व्याकरण।

क्विज़: 10 प्रश्न

नीचे 10 प्रश्न हैं। हर प्रश्न इसी पेज के नियम या उदाहरण से बना है।

Q1: संधि का शाब्दिक अर्थ क्या है?
A: मेल
B: अलगाव
C: नियम
D: वाक्य
ANS: A
WHY: संधि का अर्थ मेल है, दो वर्णों के मेल से होने वाला परिवर्तन ही संधि कहलाता है।
Q2: 'नरेश' में कौन-सी संधि है?
A: दीर्घ संधि
B: गुण संधि
C: वृद्धि संधि
D: यण संधि
ANS: B
WHY: नर + ईश में अ + ई = ए बना, गुण संधि का नियम (अ/आ + इ/ई = ए)।
Q3: 'जगन्नाथ' का सही संधि-विच्छेद क्या है?
A: जगत् + नाथ
B: जग + नाथ
C: जगत + नाथ
D: जगा + नाथ
ANS: A
WHY: त् + न = न बना, व्यंजन संधि का नियम; हलंत वाला त् ही सही विच्छेद है।
Q4: विसर्ग संधि का उदाहरण कौन-सा है?
A: विद्यालय
B: जगन्नाथ
C: मनोरथ
D: महोत्सव
ANS: C
WHY: मनः + रथ में विसर्ग से पहले अ और बाद में घोष वर्ण आने से विसर्ग ओ बना, विसर्ग संधि।
Q5: स्वर संधि के कितने भेद हैं?
A: तीन
B: चार
C: छह
D: पाँच
ANS: D
WHY: स्वर संधि के पाँच भेद हैं, दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण और अयादि।
Q6: 'सदैव' में कौन-सी संधि है?
A: गुण संधि
B: दीर्घ संधि
C: वृद्धि संधि
D: अयादि संधि
ANS: C
WHY: सदा + एव में आ + ए = ऐ बना, वृद्धि संधि का नियम (अ/आ + ए/ऐ = ऐ)।
Q7: 'उच्चारण' का सही संधि-विच्छेद क्या है?
A: उत् + चारण
B: उच्च + आरण
C: उत + चारण
D: उच्चा + रण
ANS: A
WHY: त् + च = च बना, व्यंजन संधि का नियम (त्/द् + च/छ = च)।
Q8: 'भवन' में कौन-सी संधि है?
A: यण संधि
B: अयादि संधि
C: गुण संधि
D: वृद्धि संधि
ANS: B
WHY: भो + अन में ओ के बाद भिन्न स्वर आने से ओ → अव् बना, अयादि संधि का नियम।
Q9: 'निश्चित' में कौन-सी संधि है?
A: स्वर संधि
B: व्यंजन संधि
C: गुण संधि
D: विसर्ग संधि
ANS: D
WHY: निः + चिंत में विसर्ग के बाद च आने से विसर्ग श् बना, विसर्ग संधि का नियम।
Q10: 'अतएव' में विसर्ग के साथ क्या हुआ?
A: विसर्ग र् बना
B: विसर्ग का लोप हुआ
C: विसर्ग स् बना
D: कोई परिवर्तन नहीं हुआ
ANS: B
WHY: अतः + एव में विसर्ग के बाद अ न होने से विसर्ग का लोप हुआ, विसर्ग संधि का नियम।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

संधि के कितने भेद हैं? तीन: स्वर संधि, व्यंजन संधि और विसर्ग संधि। भेद पहले हिस्से के आखिरी वर्ण से तय होता है। स्वर संधि के पाँच उपभेद (दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण, अयादि) यहाँ हैं: स्वर संधि के भेद।

संधि पहचानने की ट्रिक क्या है? शब्द के दो हिस्से करो, पहले हिस्से के आखिरी वर्ण को देखो: स्वर → स्वर संधि, व्यंजन → व्यंजन संधि, विसर्ग → विसर्ग संधि। मात्रा भी सुराग देती है: ए/ओ → गुण, ऐ/औ → वृद्धि, आ/ई/ऊ → दीर्घ। पूरा तरीका: संधि पहचानने के 4 स्टेप।

संधि-विच्छेद कैसे करें? जुड़े शब्द को मूल दो हिस्सों में तोड़ो (सूर्योदय = सूर्य + उदय): बदले वर्ण को मूल रूप में वापस लाओ। मात्रा, हलंत और विसर्ग न छूटे। स्टेप-बाई-स्टेप तरीका: संधि-विच्छेद करने की ट्रिक। और उदाहरण: संधि विच्छेद के उदाहरण।

संधि और समास में क्या अंतर है? संधि वर्णों का मेल है (देव + आलय = देवालय), समास पदों का मेल है (विद्यालय = विद्या के लिए आलय)। पूरा फर्क: समास।

संधि और संधि-विच्छेद में क्या अंतर है? संधि दो वर्णों के मिलने से बनने वाला परिवर्तन है (विद्या + आलय = विद्यालय); संधि-विच्छेद उसे वापस तोड़ना है (विद्यालय = विद्या + आलय)। एक ही नियम की दो दिशाएँ।

स्रोत

स्रोत: NCERT आधारित CBSE Class 6 हिंदी व्याकरण (संधि); नियमों और उदाहरणों का मिलान CBSE Library के संधि लेख से किया गया। संधि-समास का अंतर हिंदी विकिपीडिया के समास लेख से सत्यापित।

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