लेखक: अभ्यास नीति | Last Updated: 5 अक्टूबर 2026
संधि-विच्छेद क्या है
संधि-विच्छेद जुड़े हुए शब्द को उसके दो मूल पदों में वापस तोड़ना है — जैसे विद्यालय = विद्या + आलय। संधि जोड़ती है, विच्छेद खोलता है। इस पेज में 116 जाँचे हुए विच्छेद हैं, हर एक के साथ भेद का टैग और नियम-नोट। स्वर संधि के पाँचों भेदों के नियम स्वर संधि: भेद और नियम पेज पर और व्यंजन-विसर्ग के नियम व्यंजन और विसर्ग संधि पेज पर दिए गए हैं; नीचे हर विच्छेद उन्हीं नियम-सूत्रों से मिलाया गया है।
इस पेज में
- संधि-विच्छेद कैसे करें — 4 स्टेप
- संधि विच्छेद ≠ वर्ण विच्छेद
- पहले ये 10 आज़माओ
- दीर्घ संधि के विच्छेद (34)
- गुण संधि के विच्छेद (18)
- वृद्धि संधि के विच्छेद (13)
- यण संधि के विच्छेद (8)
- अयादि संधि के विच्छेद (8)
- व्यंजन संधि के विच्छेद (25)
- विसर्ग संधि के विच्छेद (10)
- विच्छेद में आम गलतियाँ
- क्विज़: 10 प्रश्न
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- स्रोत
संधि-विच्छेद कैसे करें — 4 स्टेप
- शब्द में वह जगह खोजो जहाँ दो पद जुड़े हैं — अक्सर मात्रा, द्वित्व (सज्जन) या विसर्ग-निशान (निश्चल) वहीं दिखता है।
- जुड़े रूप से मूल स्वर या व्यंजन वापस लाओ: महोत्सव के ‘त्सो’ में आ + उ छिपा है।
- दोनों पद अलग लिखकर नियम-सूत्र से मिलाओ: आ + उ = ओ, इसलिए भेद गुण संधि है।
- विच्छेद में मात्रा और हलंत सही लिखो: गिरि + ईश (“गिरि + इश” नहीं), सत् + आचार (“सत + आचार” नहीं)।
संधि के तीनों भेदों का परिचय संधि: परिभाषा, भेद और पहचान पेज पर है।
संधि विच्छेद ≠ वर्ण विच्छेद
संधि-विच्छेद शब्द को उसके दो पदों में तोड़ता है (विद्यालय = विद्या + आलय)। वर्ण-विच्छेद शब्द के हर वर्ण को अलग-अलग करता है (कमल = क् + अ + म् + अ + ल् + अ)। दोनों का काम अलग है।
परीक्षा में “स्वर्ग का संधि विच्छेद” और “ब्राह्मण का संधि विच्छेद” पूछा जाता है — ये संधि-विच्छेद के सवाल नहीं हैं। स्वर्ग दो पदों से बना ही नहीं है; इनका सही उत्तर वर्ण-विच्छेद है:
- स्वर्ग = स् + व् + अ + र् + ग् + अ (वर्ण-विच्छेद)
- ब्राह्मण = ब् + र् + आ + ह् + म् + अ + ण् + अ (वर्ण-विच्छेद)
पहचान का तरीका: अगर शब्द दो सार्थक पदों में न टूटे, तो वहाँ संधि-विच्छेद लगाना ही गलत है — वहाँ वर्ण-विच्छेद माँगा गया है।
पहले ये 10 आज़माओ
- विद्यालय = विद्या + आलय — दीर्घ
- नरेश = नर + ईश — गुण
- सदैव = सदा + एव — वृद्धि
- प्रत्येक = प्रति + एक — यण
- नयन = ने + अन — अयादि
- उच्चारण = उत् + चारण — व्यंजन
- सज्जन = सत् + जन — व्यंजन
- निश्चल = निः + चल — विसर्ग
- मनोरथ = मनः + रथ — विसर्ग
- अतएव = अतः + एव — विसर्ग
दीर्घ संधि के विच्छेद
नियम: एक जैसे दो स्वर मिलकर दीर्घ हो जाते हैं — अ/आ + अ/आ = आ, इ/ई + इ/ई = ई, उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ।
| शब्द | विच्छेद | नियम |
|---|---|---|
| धर्मार्थ | धर्म + अर्थ | अ + अ = आ |
| हिमालय | हिम + आलय | अ + आ = आ |
| पुस्तकालय | पुस्तक + आलय | अ + आ = आ |
| विद्यार्थी | विद्या + अर्थी | आ + अ = आ |
| विद्यालय | विद्या + आलय | आ + आ = आ |
| रवींद्र | रवि + इंद्र | इ + इ = ई |
| मुनींद्र | मुनि + इंद्र | इ + इ = ई |
| गिरीश | गिरि + ईश | इ + ई = ई |
| मुनीश | मुनि + ईश | इ + ई = ई |
| नदीश | नदी + ईश | ई + ई = ई |
| महीश | मही + ईश | ई + ई = ई |
| भानूदय | भानु + उदय | उ + उ = ऊ |
| वधूत्सव | वधू + उत्सव | ऊ + उ = ऊ |
| लघूर्मि | लघु + ऊर्मि | उ + ऊ = ऊ |
| सिंधूर्मि | सिंधु + ऊर्मि | उ + ऊ = ऊ |
| सूर्यास्त | सूर्य + अस्त | अ + अ = आ |
| वेदान्त | वेद + अन्त | अ + अ = आ |
| रामायण | राम + अयण | अ + अ = आ |
| धनार्थी | धन + अर्थी | अ + अ = आ |
| महालय | महा + आलय | आ + आ = आ |
| देवालय | देव + आलय | अ + आ = आ |
| नित्यानंद | नित्य + आनंद | अ + आ = आ |
| रामाश्रय | राम + आश्रय | अ + आ = आ |
| वार्तालाप | वार्ता + आलाप | आ + आ = आ |
| शिक्षार्थी | शिक्षा + अर्थी | आ + अ = आ |
| परीक्षार्थी | परीक्षा + अर्थी | आ + अ = आ |
| शिवालय | शिव + आलय | अ + आ = आ |
| अभीष्ट | अभि + इष्ट | इ + इ = ई |
| कवींद्र | कवि + इंद्र | इ + इ = ई |
| मंजूषा | मंजु + ऊषा | उ + ऊ = ऊ |
| सर्वाधिक | सर्व + अधिक | अ + अ = आ |
| अद्यावधि | अद्य + अवधि | अ + अ = आ |
| कमलासन | कमल + आसन | अ + आ = आ |
| स्वयंभूदय | स्वयंभू + उदय | ऊ + उ = ऊ |
गुण संधि के विच्छेद
नियम: अ/आ + इ/ई = ए, अ/आ + उ/ऊ = ओ, अ/आ + ऋ = अर्।
| शब्द | विच्छेद | नियम |
|---|---|---|
| नरेंद्र | नर + इंद्र | अ + इ = ए |
| नरेश | नर + ईश | अ + ई = ए |
| महेंद्र | महा + इंद्र | आ + इ = ए |
| महेश | महा + ईश | आ + ई = ए |
| ज्ञानोपदेश | ज्ञान + उपदेश | अ + उ = ओ |
| महोत्सव | महा + उत्सव | आ + उ = ओ |
| जलोर्मि | जल + ऊर्मि | अ + ऊ = ओ |
| महोर्मि | महा + ऊर्मि | आ + ऊ = ओ |
| देवर्षि | देव + ऋषि | अ + ऋ = अर् |
| महर्षि | महा + ऋषि | आ + ऋ = अर् |
| शुभेच्छु | शुभ + इच्छु | अ + इ = ए |
| पूर्णेंद्र | पूर्ण + इंद्र | अ + इ = ए |
| परमेश्वर | परम + ईश्वर | अ + ई = ए |
| दिनेश | दिन + ईश | अ + ई = ए |
| नरोत्तम | नर + उत्तम | अ + उ = ओ |
| गंगोर्मि | गंगा + ऊर्मि | आ + ऊ = ओ |
| राजर्षि | राज + ऋषि | अ + ऋ = अर् |
| महर्ण | महा + ऋण | आ + ऋ = अर् |
वृद्धि संधि के विच्छेद
नियम: अ/आ + ए/ऐ = ऐ, अ/आ + ओ/औ = औ।
| शब्द | विच्छेद | नियम |
|---|---|---|
| एकैक | एक + एक | अ + ए = ऐ |
| मतैक्य | मत + ऐक्य | अ + ऐ = ऐ |
| सदैव | सदा + एव | आ + ए = ऐ |
| महैश्वर्य | महा + ऐश्वर्य | आ + ऐ = ऐ |
| वनौषधि | वन + औषधि | अ + ओ = औ |
| महौषधि | महा + औषधि | आ + ओ = औ |
| परमौषध | परम + औषध | अ + औ = औ |
| महौषध | महा + औषध | आ + औ = औ |
| अद्यैव | अद्य + एव | अ + ए = ऐ |
| देवैश्वर्य | देव + ऐश्वर्य | अ + ऐ = ऐ |
| सर्वदैव | सर्वदा + एव | आ + ए = ऐ |
| उष्णौदन | उष्ण + ओदन | अ + ओ = औ |
| परमौदार्य | परम + औदार्य | अ + औ = औ |
यण संधि के विच्छेद
नियम: इ/ई + भिन्न स्वर = य्, उ/ऊ + भिन्न स्वर = व्, ऋ + भिन्न स्वर = र्।
| शब्द | विच्छेद | नियम |
|---|---|---|
| इत्यादि | इति + आदि | इ + आ = या |
| मध्वरि | मधु + अरि | उ + अ = व |
| अत्यंत | अति + अंत | इ + अ = य |
| प्रत्येक | प्रति + एक | इ + ए = ये |
| स्वच्छ | सु + अच्छ | उ + अ = व |
| स्वागत | सु + आगत | उ + आ = वा |
| यद्यपि | यदि + अपि | इ + अ = य |
| अन्वेषण | अनु + एषण | उ + ए = वे |
अयादि संधि के विच्छेद
नियम: ए + स्वर = अय्, ऐ + स्वर = आय्, ओ + स्वर = अव्, औ + स्वर = आव्।
| शब्द | विच्छेद | नियम |
|---|---|---|
| नयन | ने + अन | ए + अ = अय् |
| गायक | गै + अक | ऐ + अ = आय् |
| भवन | भो + अन | ओ + अ = अव् |
| चयन | चे + अन | ए + अ = अय् |
| नायक | नै + अक | ऐ + अ = आय् |
| शयन | शे + अन | ए + अ = अय् |
| पवन | पो + अन | ओ + अ = अव् |
| पावक | पौ + अक | औ + अ = आव् |
व्यंजन संधि के विच्छेद
नियम: पहले पद का अंतिम व्यंजन अगले वर्ण से मिलकर बदलता है; विच्छेद में हलंत सही लिखो।
| शब्द | विच्छेद | नियम |
|---|---|---|
| उच्चारण | उत् + चारण | त् + च् → च्छ |
| उच्छिष्ट | उत् + शिष्ट | त् + श् → च्छ |
| उड्डयन | उत् + डयन | त् + ड् → ड्ड |
| उद्धरण | उत् + हरण | त् + ह् → द्ध |
| उद्धार | उत् + हार | त् + ह् → द्ध |
| उन्नयन | उत् + नयन | त् का न् |
| उल्लास | उत् + लास | त् + ल् → ल्ल |
| उल्लेख | उत् + लेख | त् + ल् → ल्ल |
| जगदीश | जगत् + ईश | त् का द् |
| दिग्गज | दिक् + गज | क् का ग् |
| तद्धित | तत् + हित | त् + ह् → द्ध |
| तद्रूप | तत् + रूप | त् का द् |
| वागीश | वाक् + ईश | क् का ग् |
| वाङ्मय | वाक् + मय | क् का ङ् |
| अनुच्छेद | अनु + छेद | स्वर + छ → च्छ |
| आच्छादन | आ + छादन | स्वर + छ → च्छ |
| किंकर | किम् + कर | म् का ङ् (ं) |
| किंचित | किम् + चित | म् का ञ् (ं) |
| परिणाम | परि + नाम | न् का ण् |
| निषिद्ध | नि + सिद्ध | स् का ष् |
| अब्ज | अप् + ज | प् का ब् |
| अम्मय | अप् + मय | प् का म् |
| अभिषेक | अभि + सेक | स् का ष् |
| उज्झटिका | उत् + झटिका | त् + झ् → ज्झ |
| तट्टीका | तत् + टीका | त् + ट् → ट्ट |
विसर्ग संधि के विच्छेद
नियम: विसर्ग (ः) अगले स्वर या व्यंजन से मिलकर बदलता या लुप्त होता है।
| शब्द | विच्छेद | नियम |
|---|---|---|
| निश्चल | निः + चल | विसर्ग का श् |
| निश्चय | निः + चय | विसर्ग का श् |
| दुश्चरित्र | दुः + चरित्र | विसर्ग का श् |
| निष्पाप | निः + पाप | विसर्ग का ष् |
| मनोरथ | मनः + रथ | अ + विसर्ग → ओ |
| दुर्लभ | दुः + लभ | विसर्ग का र् |
| नीरोग | निः + रोग | विसर्ग-लोप, इ → ई |
| नमस्ते | नमः + ते | विसर्ग का स् |
| पुनश्च | पुनः + च | विसर्ग का श् |
| अतएव | अतः + एव | विसर्ग का लोप |
विच्छेद में आम गलतियाँ
- मात्रा छोड़ना। गिरीश का विच्छेद “गिरि + इश” नहीं, गिरि + ईश है। जुड़े शब्द की मात्रा दोनों पदों में सही-सही बाँटो।
- हलंत छोड़ना। सत् + आचार को “सत + आचार” लिखने से नियम (त् का द्) दिखता ही नहीं। व्यंजन संधि के विच्छेद में हलंत ज़रूरी है।
- विसर्ग छोड़ना। निश्चल का विच्छेद “नि + श्चल” नहीं, निः + चल है। च या छ से पहले श् दिखे तो विसर्ग का निशान पहचानो।
- दो पदों में न टूटने वाले शब्द पर संधि थोपना। स्वर्ग और ब्राह्मण संधि से नहीं बने; इन पर संधि-विच्छेद लगाना ही गलत है। पहले जाँचो कि शब्द दो सार्थक पदों से बना है या नहीं।
- बदले हुए रूप को मूल पद मानना। तद्धित में “धित” कोई पद नहीं है; मूल रूप तत् + हित है। विच्छेद हमेशा जुड़ने से पहले वाले रूपों में लिखो, जुड़ने के बाद वाले में नहीं।
क्विज़: 10 प्रश्न
नीचे 10 प्रश्न हैं। हर प्रश्न इसी पेज के नियम या उदाहरण से बना है।
Q1: 'महोत्सव' का सही संधि-विच्छेद क्या है? A: मह + उत्सव B: महो + त्सव C: महा + उत्सव D: महा + ओत्सव ANS: C WHY: गुण संधि का नियम आ + उ = ओ। महा + उत्सव = महोत्सव। Q2: 'प्रत्येक' किस भेद का उदाहरण है? A: यण संधि B: गुण संधि C: दीर्घ संधि D: वृद्धि संधि ANS: A WHY: यण संधि का नियम इ + ए = ये। प्रति + एक = प्रत्येक। Q3: 'नयन' का सही विच्छेद क्या है? A: नय + न B: ने + अन C: न + अयन D: नै + अन ANS: B WHY: अयादि संधि का नियम ए + अ = अय्। ने + अन = नयन। Q4: 'उच्चारण' का सही विच्छेद क्या है? A: उच् + चारण B: उत् + चारण C: उ + च्चारण D: उच्च + आरण ANS: B WHY: व्यंजन संधि में त् + च् → च्छ। उत् + चारण = उच्चारण। Q5: 'निश्चल' में विसर्ग का क्या हुआ है? A: विसर्ग का लोप हुआ B: विसर्ग ष् में बदला C: विसर्ग र् में बदला D: विसर्ग श् में बदला ANS: D WHY: विसर्ग संधि का नियम — च/छ से पहले विसर्ग श् बनता है। निः + चल = निश्चल। Q6: 'स्वर्ग का संधि-विच्छेद' पूछा जाए तो सही उत्तर क्या है? A: सु + अर्ग B: स्वर + ग C: यह संधि-विच्छेद का सवाल नहीं; स्वर्ग = स् + व् + अ + र् + ग् + अ (वर्ण-विच्छेद) D: स + वर्ग ANS: C WHY: स्वर्ग दो पदों से नहीं बना; इसका सही उत्तर वर्ण-विच्छेद है। Q7: 'एकैक' में कौन-सा नियम लगा है? A: अ + ए = ऐ B: अ + इ = ए C: आ + ए = ए D: अ + ऐ = ए ANS: A WHY: वृद्धि संधि का नियम अ + ए = ऐ। एक + एक = एकैक। Q8: 'वाङ्मय' का सही विच्छेद क्या है? A: वा + ङ्मय B: वांग + मय C: वाक् + मय D: वाक + मय ANS: C WHY: व्यंजन संधि का नियम — क् के आगे म् आने पर क् का ङ् बनता है। वाक् + मय = वाङ्मय। Q9: 'अतएव' किस भेद की संधि है? A: गुण संधि B: विसर्ग संधि C: व्यंजन संधि D: दीर्घ संधि ANS: B WHY: अतः + एव में विसर्ग का लोप हुआ है — यह विसर्ग संधि है। Q10: 'गिरीश' का सही विच्छेद क्या है? A: गिर + ईश B: गिरि + इश C: गिरी + श D: गिरि + ईश ANS: D WHY: दीर्घ संधि का नियम इ + ई = ई। गिरि + ईश = गिरीश।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
संधि विच्छेद करने की ट्रिक क्या है? पहले जुड़ने की जगह पहचानो — मात्रा, द्वित्व या विसर्ग का निशान। फिर दोनों पदों के मूल रूप लिखो और नियम-सूत्र से मिलाओ। विच्छेद में मात्रा और हलंत सही लिखना ही आधी ट्रिक है: गिरि + ईश, सत् + आचार।
स्वर्ग का संधि विच्छेद क्या है? स्वर्ग का संधि-विच्छेद नहीं होता, क्योंकि यह दो पदों से बना शब्द नहीं है। सही उत्तर वर्ण-विच्छेद है: स्वर्ग = स् + व् + अ + र् + ग् + अ।
ब्राह्मण का संधि विच्छेद क्या है? यहाँ भी वही गलती होती है। ब्राह्मण का उत्तर वर्ण-विच्छेद है: ब्राह्मण = ब् + र् + आ + ह् + म् + अ + ण् + अ।
संधि विच्छेद में सबसे आम गलती क्या है? मात्रा या हलंत छोड़ देना। “गिरि + इश” और “सत + आचार” जैसे अधूरे विच्छेदों पर अंक कटते हैं। विच्छेद हमेशा पूरे मूल रूपों में लिखो।
संधि और संधि-विच्छेद में क्या अंतर है? संधि दो पदों को जोड़ती है (विद्या + आलय = विद्यालय) और संधि-विच्छेद जुड़े शब्द को वापस खोलता है (विद्यालय = विद्या + आलय)। दोनों एक ही नियम के दो दिशा हैं।
स्रोत
स्रोत: इस पेज के सारे नियम स्वर संधि के भेद और नियम और व्यंजन और विसर्ग संधि के नियम से लिए गए हैं; हर विच्छेद इन्हीं नियम-सूत्रों से मिलाया गया है। वर्ण-विच्छेद की परिभाषा और स्वर्ग/ब्राह्मण के वर्ण-विच्छेद cbsetuts के वर्ण-विच्छेद पेज (https://www.cbsetuts.com/varn-vichchhed-in-hindi/) से सत्यापित। हिंदी व्याकरण के सभी टॉपिक हब पेज पर क्रम से मिलेंगे।