संधि-विच्छेद: 116 उदाहरण, भेद-वार सूची

लेखक: अभ्यास नीति | Last Updated: 5 अक्टूबर 2026

संधि-विच्छेद क्या है

संधि-विच्छेद जुड़े हुए शब्द को उसके दो मूल पदों में वापस तोड़ना है — जैसे विद्यालय = विद्या + आलय। संधि जोड़ती है, विच्छेद खोलता है। इस पेज में 116 जाँचे हुए विच्छेद हैं, हर एक के साथ भेद का टैग और नियम-नोट। स्वर संधि के पाँचों भेदों के नियम स्वर संधि: भेद और नियम पेज पर और व्यंजन-विसर्ग के नियम व्यंजन और विसर्ग संधि पेज पर दिए गए हैं; नीचे हर विच्छेद उन्हीं नियम-सूत्रों से मिलाया गया है।

इस पेज में

संधि-विच्छेद कैसे करें — 4 स्टेप

  1. शब्द में वह जगह खोजो जहाँ दो पद जुड़े हैं — अक्सर मात्रा, द्वित्व (सज्जन) या विसर्ग-निशान (निश्चल) वहीं दिखता है।
  2. जुड़े रूप से मूल स्वर या व्यंजन वापस लाओ: महोत्सव के ‘त्सो’ में आ + उ छिपा है।
  3. दोनों पद अलग लिखकर नियम-सूत्र से मिलाओ: आ + उ = ओ, इसलिए भेद गुण संधि है।
  4. विच्छेद में मात्रा और हलंत सही लिखो: गिरि + ईश (“गिरि + इश” नहीं), सत् + आचार (“सत + आचार” नहीं)।

संधि के तीनों भेदों का परिचय संधि: परिभाषा, भेद और पहचान पेज पर है।

संधि विच्छेद ≠ वर्ण विच्छेद

संधि-विच्छेद शब्द को उसके दो पदों में तोड़ता है (विद्यालय = विद्या + आलय)। वर्ण-विच्छेद शब्द के हर वर्ण को अलग-अलग करता है (कमल = क् + अ + म् + अ + ल् + अ)। दोनों का काम अलग है।

परीक्षा में “स्वर्ग का संधि विच्छेद” और “ब्राह्मण का संधि विच्छेद” पूछा जाता है — ये संधि-विच्छेद के सवाल नहीं हैं। स्वर्ग दो पदों से बना ही नहीं है; इनका सही उत्तर वर्ण-विच्छेद है:

  • स्वर्ग = स् + व् + अ + र् + ग् + अ (वर्ण-विच्छेद)
  • ब्राह्मण = ब् + र् + आ + ह् + म् + अ + ण् + अ (वर्ण-विच्छेद)

पहचान का तरीका: अगर शब्द दो सार्थक पदों में न टूटे, तो वहाँ संधि-विच्छेद लगाना ही गलत है — वहाँ वर्ण-विच्छेद माँगा गया है।

पहले ये 10 आज़माओ

  1. विद्यालय = विद्या + आलय — दीर्घ
  2. नरेश = नर + ईश — गुण
  3. सदैव = सदा + एव — वृद्धि
  4. प्रत्येक = प्रति + एक — यण
  5. नयन = ने + अन — अयादि
  6. उच्चारण = उत् + चारण — व्यंजन
  7. सज्जन = सत् + जन — व्यंजन
  8. निश्चल = निः + चल — विसर्ग
  9. मनोरथ = मनः + रथ — विसर्ग
  10. अतएव = अतः + एव — विसर्ग

दीर्घ संधि के विच्छेद

नियम: एक जैसे दो स्वर मिलकर दीर्घ हो जाते हैं — अ/आ + अ/आ = आ, इ/ई + इ/ई = ई, उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ।

शब्द विच्छेद नियम
धर्मार्थ धर्म + अर्थ अ + अ = आ
हिमालय हिम + आलय अ + आ = आ
पुस्तकालय पुस्तक + आलय अ + आ = आ
विद्यार्थी विद्या + अर्थी आ + अ = आ
विद्यालय विद्या + आलय आ + आ = आ
रवींद्र रवि + इंद्र इ + इ = ई
मुनींद्र मुनि + इंद्र इ + इ = ई
गिरीश गिरि + ईश इ + ई = ई
मुनीश मुनि + ईश इ + ई = ई
नदीश नदी + ईश ई + ई = ई
महीश मही + ईश ई + ई = ई
भानूदय भानु + उदय उ + उ = ऊ
वधूत्सव वधू + उत्सव ऊ + उ = ऊ
लघूर्मि लघु + ऊर्मि उ + ऊ = ऊ
सिंधूर्मि सिंधु + ऊर्मि उ + ऊ = ऊ
सूर्यास्त सूर्य + अस्त अ + अ = आ
वेदान्त वेद + अन्त अ + अ = आ
रामायण राम + अयण अ + अ = आ
धनार्थी धन + अर्थी अ + अ = आ
महालय महा + आलय आ + आ = आ
देवालय देव + आलय अ + आ = आ
नित्यानंद नित्य + आनंद अ + आ = आ
रामाश्रय राम + आश्रय अ + आ = आ
वार्तालाप वार्ता + आलाप आ + आ = आ
शिक्षार्थी शिक्षा + अर्थी आ + अ = आ
परीक्षार्थी परीक्षा + अर्थी आ + अ = आ
शिवालय शिव + आलय अ + आ = आ
अभीष्ट अभि + इष्ट इ + इ = ई
कवींद्र कवि + इंद्र इ + इ = ई
मंजूषा मंजु + ऊषा उ + ऊ = ऊ
सर्वाधिक सर्व + अधिक अ + अ = आ
अद्यावधि अद्य + अवधि अ + अ = आ
कमलासन कमल + आसन अ + आ = आ
स्वयंभूदय स्वयंभू + उदय ऊ + उ = ऊ

गुण संधि के विच्छेद

नियम: अ/आ + इ/ई = ए, अ/आ + उ/ऊ = ओ, अ/आ + ऋ = अर्।

शब्द विच्छेद नियम
नरेंद्र नर + इंद्र अ + इ = ए
नरेश नर + ईश अ + ई = ए
महेंद्र महा + इंद्र आ + इ = ए
महेश महा + ईश आ + ई = ए
ज्ञानोपदेश ज्ञान + उपदेश अ + उ = ओ
महोत्सव महा + उत्सव आ + उ = ओ
जलोर्मि जल + ऊर्मि अ + ऊ = ओ
महोर्मि महा + ऊर्मि आ + ऊ = ओ
देवर्षि देव + ऋषि अ + ऋ = अर्
महर्षि महा + ऋषि आ + ऋ = अर्
शुभेच्छु शुभ + इच्छु अ + इ = ए
पूर्णेंद्र पूर्ण + इंद्र अ + इ = ए
परमेश्वर परम + ईश्वर अ + ई = ए
दिनेश दिन + ईश अ + ई = ए
नरोत्तम नर + उत्तम अ + उ = ओ
गंगोर्मि गंगा + ऊर्मि आ + ऊ = ओ
राजर्षि राज + ऋषि अ + ऋ = अर्
महर्ण महा + ऋण आ + ऋ = अर्

वृद्धि संधि के विच्छेद

नियम: अ/आ + ए/ऐ = ऐ, अ/आ + ओ/औ = औ।

शब्द विच्छेद नियम
एकैक एक + एक अ + ए = ऐ
मतैक्य मत + ऐक्य अ + ऐ = ऐ
सदैव सदा + एव आ + ए = ऐ
महैश्वर्य महा + ऐश्वर्य आ + ऐ = ऐ
वनौषधि वन + औषधि अ + ओ = औ
महौषधि महा + औषधि आ + ओ = औ
परमौषध परम + औषध अ + औ = औ
महौषध महा + औषध आ + औ = औ
अद्यैव अद्य + एव अ + ए = ऐ
देवैश्वर्य देव + ऐश्वर्य अ + ऐ = ऐ
सर्वदैव सर्वदा + एव आ + ए = ऐ
उष्णौदन उष्ण + ओदन अ + ओ = औ
परमौदार्य परम + औदार्य अ + औ = औ

यण संधि के विच्छेद

नियम: इ/ई + भिन्न स्वर = य्, उ/ऊ + भिन्न स्वर = व्, ऋ + भिन्न स्वर = र्।

शब्द विच्छेद नियम
इत्यादि इति + आदि इ + आ = या
मध्वरि मधु + अरि उ + अ = व
अत्यंत अति + अंत इ + अ = य
प्रत्येक प्रति + एक इ + ए = ये
स्वच्छ सु + अच्छ उ + अ = व
स्वागत सु + आगत उ + आ = वा
यद्यपि यदि + अपि इ + अ = य
अन्वेषण अनु + एषण उ + ए = वे

अयादि संधि के विच्छेद

नियम: ए + स्वर = अय्, ऐ + स्वर = आय्, ओ + स्वर = अव्, औ + स्वर = आव्।

शब्द विच्छेद नियम
नयन ने + अन ए + अ = अय्
गायक गै + अक ऐ + अ = आय्
भवन भो + अन ओ + अ = अव्
चयन चे + अन ए + अ = अय्
नायक नै + अक ऐ + अ = आय्
शयन शे + अन ए + अ = अय्
पवन पो + अन ओ + अ = अव्
पावक पौ + अक औ + अ = आव्

व्यंजन संधि के विच्छेद

नियम: पहले पद का अंतिम व्यंजन अगले वर्ण से मिलकर बदलता है; विच्छेद में हलंत सही लिखो।

शब्द विच्छेद नियम
उच्चारण उत् + चारण त् + च् → च्छ
उच्छिष्ट उत् + शिष्ट त् + श् → च्छ
उड्डयन उत् + डयन त् + ड् → ड्ड
उद्धरण उत् + हरण त् + ह् → द्ध
उद्धार उत् + हार त् + ह् → द्ध
उन्नयन उत् + नयन त् का न्
उल्लास उत् + लास त् + ल् → ल्ल
उल्लेख उत् + लेख त् + ल् → ल्ल
जगदीश जगत् + ईश त् का द्
दिग्गज दिक् + गज क् का ग्
तद्धित तत् + हित त् + ह् → द्ध
तद्रूप तत् + रूप त् का द्
वागीश वाक् + ईश क् का ग्
वाङ्मय वाक् + मय क् का ङ्
अनुच्छेद अनु + छेद स्वर + छ → च्छ
आच्छादन आ + छादन स्वर + छ → च्छ
किंकर किम् + कर म् का ङ् (ं)
किंचित किम् + चित म् का ञ् (ं)
परिणाम परि + नाम न् का ण्
निषिद्ध नि + सिद्ध स् का ष्
अब्ज अप् + ज प् का ब्
अम्मय अप् + मय प् का म्
अभिषेक अभि + सेक स् का ष्
उज्झटिका उत् + झटिका त् + झ् → ज्झ
तट्टीका तत् + टीका त् + ट् → ट्ट

विसर्ग संधि के विच्छेद

नियम: विसर्ग (ः) अगले स्वर या व्यंजन से मिलकर बदलता या लुप्त होता है।

शब्द विच्छेद नियम
निश्चल निः + चल विसर्ग का श्
निश्चय निः + चय विसर्ग का श्
दुश्चरित्र दुः + चरित्र विसर्ग का श्
निष्पाप निः + पाप विसर्ग का ष्
मनोरथ मनः + रथ अ + विसर्ग → ओ
दुर्लभ दुः + लभ विसर्ग का र्
नीरोग निः + रोग विसर्ग-लोप, इ → ई
नमस्ते नमः + ते विसर्ग का स्
पुनश्च पुनः + च विसर्ग का श्
अतएव अतः + एव विसर्ग का लोप

विच्छेद में आम गलतियाँ

  1. मात्रा छोड़ना। गिरीश का विच्छेद “गिरि + इश” नहीं, गिरि + ईश है। जुड़े शब्द की मात्रा दोनों पदों में सही-सही बाँटो।
  2. हलंत छोड़ना। सत् + आचार को “सत + आचार” लिखने से नियम (त् का द्) दिखता ही नहीं। व्यंजन संधि के विच्छेद में हलंत ज़रूरी है।
  3. विसर्ग छोड़ना। निश्चल का विच्छेद “नि + श्चल” नहीं, निः + चल है। च या छ से पहले श् दिखे तो विसर्ग का निशान पहचानो।
  4. दो पदों में न टूटने वाले शब्द पर संधि थोपना। स्वर्ग और ब्राह्मण संधि से नहीं बने; इन पर संधि-विच्छेद लगाना ही गलत है। पहले जाँचो कि शब्द दो सार्थक पदों से बना है या नहीं।
  5. बदले हुए रूप को मूल पद मानना। तद्धित में “धित” कोई पद नहीं है; मूल रूप तत् + हित है। विच्छेद हमेशा जुड़ने से पहले वाले रूपों में लिखो, जुड़ने के बाद वाले में नहीं।

क्विज़: 10 प्रश्न

नीचे 10 प्रश्न हैं। हर प्रश्न इसी पेज के नियम या उदाहरण से बना है।

Q1: 'महोत्सव' का सही संधि-विच्छेद क्या है?
A: मह + उत्सव
B: महो + त्सव
C: महा + उत्सव
D: महा + ओत्सव
ANS: C
WHY: गुण संधि का नियम आ + उ = ओ। महा + उत्सव = महोत्सव।
Q2: 'प्रत्येक' किस भेद का उदाहरण है?
A: यण संधि
B: गुण संधि
C: दीर्घ संधि
D: वृद्धि संधि
ANS: A
WHY: यण संधि का नियम इ + ए = ये। प्रति + एक = प्रत्येक।
Q3: 'नयन' का सही विच्छेद क्या है?
A: नय + न
B: ने + अन
C: न + अयन
D: नै + अन
ANS: B
WHY: अयादि संधि का नियम ए + अ = अय्। ने + अन = नयन।
Q4: 'उच्चारण' का सही विच्छेद क्या है?
A: उच् + चारण
B: उत् + चारण
C: उ + च्चारण
D: उच्च + आरण
ANS: B
WHY: व्यंजन संधि में त् + च् → च्छ। उत् + चारण = उच्चारण।
Q5: 'निश्चल' में विसर्ग का क्या हुआ है?
A: विसर्ग का लोप हुआ
B: विसर्ग ष् में बदला
C: विसर्ग र् में बदला
D: विसर्ग श् में बदला
ANS: D
WHY: विसर्ग संधि का नियम — च/छ से पहले विसर्ग श् बनता है। निः + चल = निश्चल।
Q6: 'स्वर्ग का संधि-विच्छेद' पूछा जाए तो सही उत्तर क्या है?
A: सु + अर्ग
B: स्वर + ग
C: यह संधि-विच्छेद का सवाल नहीं; स्वर्ग = स् + व् + अ + र् + ग् + अ (वर्ण-विच्छेद)
D: स + वर्ग
ANS: C
WHY: स्वर्ग दो पदों से नहीं बना; इसका सही उत्तर वर्ण-विच्छेद है।
Q7: 'एकैक' में कौन-सा नियम लगा है?
A: अ + ए = ऐ
B: अ + इ = ए
C: आ + ए = ए
D: अ + ऐ = ए
ANS: A
WHY: वृद्धि संधि का नियम अ + ए = ऐ। एक + एक = एकैक।
Q8: 'वाङ्मय' का सही विच्छेद क्या है?
A: वा + ङ्मय
B: वांग + मय
C: वाक् + मय
D: वाक + मय
ANS: C
WHY: व्यंजन संधि का नियम — क् के आगे म् आने पर क् का ङ् बनता है। वाक् + मय = वाङ्मय।
Q9: 'अतएव' किस भेद की संधि है?
A: गुण संधि
B: विसर्ग संधि
C: व्यंजन संधि
D: दीर्घ संधि
ANS: B
WHY: अतः + एव में विसर्ग का लोप हुआ है — यह विसर्ग संधि है।
Q10: 'गिरीश' का सही विच्छेद क्या है?
A: गिर + ईश
B: गिरि + इश
C: गिरी + श
D: गिरि + ईश
ANS: D
WHY: दीर्घ संधि का नियम इ + ई = ई। गिरि + ईश = गिरीश।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

संधि विच्छेद करने की ट्रिक क्या है? पहले जुड़ने की जगह पहचानो — मात्रा, द्वित्व या विसर्ग का निशान। फिर दोनों पदों के मूल रूप लिखो और नियम-सूत्र से मिलाओ। विच्छेद में मात्रा और हलंत सही लिखना ही आधी ट्रिक है: गिरि + ईश, सत् + आचार।

स्वर्ग का संधि विच्छेद क्या है? स्वर्ग का संधि-विच्छेद नहीं होता, क्योंकि यह दो पदों से बना शब्द नहीं है। सही उत्तर वर्ण-विच्छेद है: स्वर्ग = स् + व् + अ + र् + ग् + अ।

ब्राह्मण का संधि विच्छेद क्या है? यहाँ भी वही गलती होती है। ब्राह्मण का उत्तर वर्ण-विच्छेद है: ब्राह्मण = ब् + र् + आ + ह् + म् + अ + ण् + अ।

संधि विच्छेद में सबसे आम गलती क्या है? मात्रा या हलंत छोड़ देना। “गिरि + इश” और “सत + आचार” जैसे अधूरे विच्छेदों पर अंक कटते हैं। विच्छेद हमेशा पूरे मूल रूपों में लिखो।

संधि और संधि-विच्छेद में क्या अंतर है? संधि दो पदों को जोड़ती है (विद्या + आलय = विद्यालय) और संधि-विच्छेद जुड़े शब्द को वापस खोलता है (विद्यालय = विद्या + आलय)। दोनों एक ही नियम के दो दिशा हैं।

स्रोत

स्रोत: इस पेज के सारे नियम स्वर संधि के भेद और नियम और व्यंजन और विसर्ग संधि के नियम से लिए गए हैं; हर विच्छेद इन्हीं नियम-सूत्रों से मिलाया गया है। वर्ण-विच्छेद की परिभाषा और स्वर्ग/ब्राह्मण के वर्ण-विच्छेद cbsetuts के वर्ण-विच्छेद पेज (https://www.cbsetuts.com/varn-vichchhed-in-hindi/) से सत्यापित। हिंदी व्याकरण के सभी टॉपिक हब पेज पर क्रम से मिलेंगे।

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