लेखक: अभ्यास नीति | Last Updated: 5 अक्टूबर 2026
राजपुत्र एक शब्द है, पर इसके भीतर तीन शब्द छिपे हैं: राजा का पुत्र। दो या दो से अधिक पदों के मेल से बने ऐसे संक्षिप्त शब्द को समास कहते हैं। समास के छह भेद हैं: अव्ययीभाव, तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, द्वंद्व और बहुव्रीहि। इस पेज पर परिभाषा, विग्रह करने की विधि, हर भेद के जाँचे हुए उदाहरण, पहचानने के स्टेप, आम गलतियाँ और 10 प्रश्नों का क्विज़ है। हिंदी व्याकरण के बाकी टॉपिक हिंदी व्याकरण हब पर क्रम से मिलेंगे।
इस पेज में
- समास किसे कहते हैं
- समास-विग्रह क्या है
- समास के छह भेद: एक नज़र में
- 1. अव्ययीभाव समास
- 2. तत्पुरुष समास
- 3. कर्मधारय समास
- 4. द्विगु समास
- 5. द्वंद्व समास
- 6. बहुव्रीहि समास
- समास पहचानने के 5 स्टेप
- संधि और समास में क्या फर्क है
- आम गलतियाँ
- याद रखने की ट्रिक
- क्विज़: 10 प्रश्न
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- स्रोत
समास किसे कहते हैं
समास संक्षेप करने की प्रक्रिया है। दो या दो से अधिक पदों का परस्पर संबंध बताने वाले शब्दों या कारक-चिह्नों का लोप होकर जब वे मिलकर एक स्वतंत्र शब्द बनाते हैं, वह समास कहलाता है। जैसे ‘दया का सागर’ से ‘दयासागर’ बना — बीच का ‘का’ गायब हो गया।
मेल में दो पद होते हैं: पहला पूर्व पद, दूसरा उत्तर पद। दोनों के मेल से बना नया संक्षिप्त शब्द समस्त पद कहलाता है। जैसे: राष्ट्र (पूर्व पद) + पति (उत्तर पद) = राष्ट्रपति (समस्त पद)।
समास की तीन पहचान याद रखो: दो या दो से अधिक पदों का मेल होता है; पदों के बीच विभक्ति-चिह्नों का लोप हो जाता है; और बने शब्द में कभी उत्तर पद प्रधान होता है, कभी पूर्व पद, कभी दोनों, कभी कोई नहीं।
- राजा का पुत्र = राजपुत्र (‘का’ का लोप)
- विद्या के लिए आलय = विद्यालय (‘के लिए’ का लोप)
- माता और पिता = माता-पिता (‘और’ का लोप)
समास-विग्रह क्या है
समास-विग्रह सामासिक शब्दों को विभक्ति सहित अलग करके उनके संबंधों को स्पष्ट करने की प्रक्रिया है। यह समास-रचना की उल्टी प्रक्रिया है: समास जोड़ता है, विग्रह तोड़ता है।
- राजपुत्र = राजा का पुत्र
- माता-पिता = माता और पिता
विग्रह करने की 4-स्टेप विधि
- समस्त पद के दो पद अलग करो: पूर्व पद और उत्तर पद पहचानो (राजपुत्र → राजा + पुत्र)।
- बीच में छूटा संबंध-शब्द वापस लाओ: और/या (माता-पिता), का/के/की/को/से/के लिए/में/पर (राजपुत्र), है जो/के समान (नीलकमल), का समूह (त्रिलोक), के अनुसार/भर (यथाशक्ति)।
- विग्रह को पढ़कर जाँचो: क्या अर्थ मूल शब्द से मेल खाता है? ‘राजा और पुत्र’ राजपुत्र का अर्थ नहीं देता, इसलिए ‘और’ गलत है; ‘राजा का पुत्र’ सही है।
- अगर दोनों पदों से कोई तीसरा अर्थ निकल रहा हो (कोई व्यक्ति, देवता या स्थान), तो वही विग्रह रखो: लम्बोदर = लम्बा उदर है जिनका अर्थात् गणेशजी।
तोड़ने की प्रैक्टिस के लिए संधि-विच्छेद के उदाहरण भी देखो: संधि विच्छेद के उदाहरण।
समास के छह भेद: एक नज़र में
समास के छह भेद होते हैं — हिंदी विकिपीडिया और NCERT-आधारित CBSE व्याकरण, दोनों इस गिनती पर एकमत हैं।
| भेद | कौन प्रधान | पहचान का संकेत | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| अव्ययीभाव | पहला पद (अव्यय) | यथा, प्रति, आ, भर, हर | प्रतिदिन = प्रति + दिन |
| तत्पुरुष | दूसरा पद (उत्तरपद) | कारक-चिह्न का लोप | राजपुत्र = राजा का पुत्र |
| कर्मधारय | दूसरा पद | है जो / के समान | नीलकमल = नीला है जो कमल |
| द्विगु | दूसरा पद (समूह) | पहला पद संख्यावाचक | त्रिलोक = तीन लोकों का समाहार |
| द्वंद्व | दोनों पद | और / या का लोप | माता-पिता = माता और पिता |
| बहुव्रीहि | कोई नहीं (तीसरा अर्थ) | व्यक्ति या देवता का बोध | लम्बोदर = गणेशजी |
एक बात साफ कर लें: कुछ किताबें कर्मधारय और द्विगु को तत्पुरुष का उपभेद गिनती हैं। यह पेज परंपरागत छह-भेद सूची लेता है, जिस पर दोनों मानक स्रोत एकमत हैं।
1. अव्ययीभाव समास
जिस समास में पूर्वपद अव्यय हो, वह अव्ययीभाव समास कहलाता है। समस्त पद वाक्य में क्रिया-विशेषण का काम करता है। पहचान: यथा, प्रति, आ, निर्, भर, हर, बे जैसे अव्यय या उपसर्ग पहले पद में दिखें; या एक ही शब्द की आवृत्ति हो।
- प्रतिदिन = प्रति + दिन (प्रत्येक दिन)
- यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार
- यथास्थान = स्थान के अनुसार
- आजीवन = जीवन-भर
2. तत्पुरुष समास
जिस समास में पूर्वपद गौण और उत्तरपद प्रधान हो, वह तत्पुरुष समास कहलाता है। दोनों पदों के बीच परसर्ग (कारक-चिह्न) का लोप रहता है। लुप्त चिह्न के आधार पर इसके छह उपभेद हैं:
| उपभेद | लुप्त चिह्न | उदाहरण |
|---|---|---|
| कर्म तत्पुरुष | को | मतदाता = मत को देने वाला |
| करण तत्पुरुष | से / के द्वारा | जन्मजात = जन्म से उत्पन्न |
| सम्प्रदान तत्पुरुष | के लिए | सत्याग्रह = सत्य के लिए आग्रह |
| अपादान तत्पुरुष | से (अलग होना) | धनहीन = धन से हीन |
| संबंध तत्पुरुष | का / के / की | राजपुत्र = राजा का पुत्र |
| अधिकरण तत्पुरुष | में / पर | आत्मविश्वास = आत्मा पर विश्वास |
परीक्षा में उपभेद का नाम सीधे पूछा जाता है: लुप्त चिह्न पहचानो, उपभेद खुद मिल जाएगा।
3. कर्मधारय समास
जिस समास में पूर्वपद विशेषण और उत्तरपद विशेष्य हो, वह कर्मधारय समास कहलाता है। इसमें भी उत्तरपद प्रधान होता है। पहचान: विग्रह करने पर दोनों पदों के बीच ‘है जो’ या ‘के समान’ आए।
- नीलकमल = नीला है जो कमल
- कालीमिर्च = काली है जो मिर्च
- पीताम्बर = पीत (पीला) है जो अम्बर
- चन्द्रमुखी = चन्द्र के समान मुख वाली
4. द्विगु समास
जिस समास में पूर्वपद संख्यावाचक विशेषण हो, वह द्विगु समास कहलाता है। समस्त पद किसी समूह का बोध कराता है — संख्या अकेली नहीं आती, समूह साथ आता है।
- नवरत्न = नौ रत्नों का समूह
- सप्तदीप = सात दीपों का समूह
- त्रिभुवन = तीन भुवनों का समूह
- त्रिलोक = तीन लोकों का समाहार
5. द्वंद्व समास
जिस समास में पूर्वपद और उत्तरपद दोनों ही प्रधान हों और उनके बीच संयोजक शब्द का लोप हो, वह द्वंद्व समास कहलाता है। लुप्त होने वाले शब्द: और, अथवा, या, एवं।
- माता-पिता = माता और पिता
- भाई-बहन = भाई और बहन
- पाप-पुण्य = पाप और पुण्य
- सुख-दुःख = सुख और दुःख
‘और’ समान प्रकृति के पदों के बीच आता है (माता-पिता), ‘या’ विपरीत प्रकृति के बीच (पाप-पुण्य)।
6. बहुव्रीहि समास
जिस समास में दोनों पदों के माध्यम से किसी तीसरे, विशेष अर्थ का बोध हो, वह बहुव्रीहि समास कहलाता है। दोनों पद अप्रधान होते हैं; समस्त पद से किसी व्यक्ति, देवता या वस्तु का बोध होता है।
- लम्बोदर = लम्बा उदर है जिनका अर्थात् गणेशजी
- नीलकण्ठ = नीला कण्ठ है जिनका अर्थात् शिवजी
- दशानन = दश है आनन जिसके अर्थात् रावण
- महात्मा = महान् आत्मा है जिसकी
समास पहचानने के 5 स्टेप
- विग्रह करो: समस्त पद को दो पदों में तोड़ो और बीच का छूटा संबंध-शब्द वापस लाओ।
- ‘और’ या ‘या’ छूटा हो → द्वंद्व (माता-पिता, पाप-पुण्य)।
- संख्या दिखे तो समूह जाँचो: समूह का बोध → द्विगु (त्रिलोक); संख्या के बावजूद व्यक्ति या देवता का बोध → बहुव्रीहि (त्रिलोचन = तीन नेत्रों वाले अर्थात् शिव)।
- ‘है जो’ या ‘के समान’ आए → कर्मधारय (नीलकमल); पर अर्थ किसी तीसरे की ओर जाए → बहुव्रीहि (महावीर = महान वीर हैं जो अर्थात् हनुमान)।
- कारक-चिह्न (का/के/की/को/से/के लिए/में/पर) छूटा हो → तत्पुरुष (राजपुत्र); पहला पद यथा/प्रति/आ/भर जैसा अव्यय हो → अव्ययीभाव (प्रतिदिन)।
संधि और समास में क्या फर्क है
| संधि | समास | |
|---|---|---|
| मेल किसका होता है | वर्णों का | पदों (शब्दों) का |
| मेल में क्या छूटता है | कुछ नहीं; वर्ण बदलता, जुड़ता या छूटता है | बीच के संबंध-शब्द या कारक-चिह्न |
| उदाहरण | देव + आलय = देवालय | विद्या के लिए आलय = विद्यालय |
नरेंद्र संधि है (नर + इंद्र, वर्णों का मेल), राजपुत्र समास है (राजा का पुत्र, पदों का मेल)। संधि का पूरा विषय यहाँ है: संधि: परिभाषा, भेद और पहचानने की ट्रिक। स्वर संधि का विस्तार: स्वर संधि।
आम गलतियाँ
- ‘महावीर’ को तत्पुरुष या कर्मधारय समझना। विग्रह में ‘है जो’ दिखता है, पर सही विग्रह ‘महान वीर हैं जो अर्थात् हनुमान’ है — अर्थ किसी तीसरे की ओर गया, इसलिए बहुव्रीहि समास है।
- ‘नीलकंठ’ को एक ही भेद में बाँधना। ‘नीला कंठ’ विग्रह कर्मधारय देता है, ‘नीला है कंठ जिनका अर्थात् शिव’ बहुव्रीहि देता है — दोनों सही हैं, प्रश्न का संदर्भ देखो।
- द्विगु और बहुव्रीहि में उलझना। ‘चौराहा’ = चार राहों का समूह (द्विगु); ‘चतुर्भुज’ = चार हैं भुजाएँ जिसके अर्थात् विष्णु (बहुव्रीहि)। संख्या + समूह = द्विगु, संख्या + व्यक्ति = बहुव्रीहि।
- ‘पीतांबर’ को सिर्फ कर्मधारय मानना। ‘पीत है जो अम्बर’ कर्मधारय है, पर ‘पीला है अम्बर जिनका अर्थात् श्रीकृष्ण’ बहुव्रीहि है — दोनों मानक स्रोत इसे अलग-अलग भेद में रखते हैं, इसलिए प्रश्न का संदर्भ पढ़ो।
- द्वंद्व में ‘और’ और ‘या’ का फर्क भूलना। समान प्रकृति के पदों में ‘और’ (माता-पिता), विपरीत प्रकृति में ‘या’ (पाप-पुण्य) — विग्रह लिखते समय यही चिह्न आता है।
याद रखने की ट्रिक
एक सवाल पूछो: कौन प्रधान है?
- पहला पद प्रधान (और वह अव्यय है) → अव्ययीभाव
- दूसरा पद प्रधान → तत्पुरुष, कर्मधारय या द्विगु; अब विग्रह के बीच वाला शब्द देखो: कारक-चिह्न → तत्पुरुष, ‘है जो/के समान’ → कर्मधारय, संख्या + समूह → द्विगु
- दोनों पद प्रधान → द्वंद्व
- कोई पद प्रधान नहीं, तीसरा अर्थ प्रधान → बहुव्रीहि
क्विज़: 10 प्रश्न
नीचे 10 प्रश्न हैं। हर प्रश्न इसी पेज के नियमों और उदाहरणों से बना है।
Q1: 'प्रतिदिन' में कौन-सा समास है? A: तत्पुरुष समास B: अव्ययीभाव समास C: द्वंद्व समास D: कर्मधारय समास ANS: B WHY: प्रति (अव्यय) + दिन; पूर्वपद प्रधान और समस्त पद क्रिया-विशेषण बना, अव्ययीभाव का नियम। Q2: 'राजपुत्र' का सही समास-विग्रह क्या है? A: राजा का पुत्र B: राजा और पुत्र C: राजा है जो पुत्र D: राजा के समान पुत्र ANS: A WHY: 'का' कारक-चिह्न का लोप हुआ और उत्तरपद प्रधान है, तत्पुरुष समास। Q3: 'माता-पिता' में कौन-सा समास है? A: द्विगु समास B: बहुव्रीहि समास C: तत्पुरुष समास D: द्वंद्व समास ANS: D WHY: विग्रह 'माता और पिता' — दोनों पद प्रधान, संयोजक शब्द का लोप, द्वंद्व समास। Q4: 'नीलकमल' में कौन-सा समास है? A: बहुव्रीहि समास B: कर्मधारय समास C: तत्पुरुष समास D: द्विगु समास ANS: B WHY: विग्रह 'नीला है जो कमल' — विशेषण-विशेष्य संबंध, कर्मधारय समास। Q5: 'दोपहर' में कौन-सा समास है? A: द्विगु समास B: द्वंद्व समास C: अव्ययीभाव समास D: कर्मधारय समास ANS: A WHY: 'दो' संख्यावाचक पूर्वपद है और समस्त पद पहरों के समूह का बोध कराता है, द्विगु समास। Q6: 'लम्बोदर' में कौन-सा समास है? A: कर्मधारय समास B: द्विगु समास C: बहुव्रीहि समास D: तत्पुरुष समास ANS: C WHY: 'लम्बा उदर है जिनका अर्थात् गणेशजी' — दोनों पद अप्रधान, तीसरा अर्थ प्रधान, बहुव्रीहि समास। Q7: 'सत्याग्रह' में कौन-सा समास है? A: अव्ययीभाव समास B: बहुव्रीहि समास C: द्वंद्व समास D: तत्पुरुष समास ANS: D WHY: विग्रह 'सत्य के लिए आग्रह' — 'के लिए' सम्प्रदान कारक-चिह्न का लोप, तत्पुरुष समास। Q8: 'चन्द्रमुखी' में कौन-सा समास है? A: कर्मधारय समास B: बहुव्रीहि समास C: तत्पुरुष समास D: द्विगु समास ANS: A WHY: विग्रह 'चन्द्र के समान मुख वाली' — उपमान-उपमेय संबंध, कर्मधारय समास। Q9: 'चौराहा' और 'चतुर्भुज' में क्या फर्क है? A: दोनों द्विगु समास हैं B: चौराहा द्विगु है, चतुर्भुज बहुव्रीहि है C: दोनों बहुव्रीहि समास हैं D: चौराहा बहुव्रीहि है, चतुर्भुज द्विगु है ANS: B WHY: चौराहा = चार राहों का समूह (संख्या + समूह = द्विगु); चतुर्भुज = चार हैं भुजाएँ जिसके अर्थात् विष्णु (तीसरा अर्थ = बहुव्रीहि)। Q10: संधि और समास में सही फर्क कौन-सा है? A: दोनों में वर्णों का मेल होता है B: संधि में पदों का मेल, समास में वर्णों का मेल होता है C: संधि में वर्णों का मेल होता है, समास में पदों का मेल (संबंध-शब्दों का लोप) D: संधि और समास में कोई फर्क नहीं है ANS: C WHY: संधि = वर्णों का मेल (देव + आलय = देवालय); समास = पदों का मेल जिसमें संबंध-शब्द छूटते हैं (विद्या के लिए आलय = विद्यालय)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
समास के कितने भेद हैं? छह: अव्ययीभाव, तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, द्वंद्व और बहुव्रीहि। हिंदी विकिपीडिया और NCERT-आधारित CBSE व्याकरण दोनों इसी गिनती पर एकमत हैं। कुछ किताबें कर्मधारय और द्विगु को तत्पुरुष का उपभेद गिनती हैं, पर परंपरागत सूची छह भेदों की ही है।
संधि और समास को कैसे अलग पहचानें? मेल किस स्तर पर हुआ, यह देखो। वर्ण बदले, जुड़े या छूटे तो संधि है (नर + इंद्र = नरेंद्र); पूरे पद जुड़े और बीच का संबंध-शब्द गायब हुआ तो समास है (राजा का पुत्र = राजपुत्र)।
समास-विग्रह कैसे करें? समस्त पद को दो पदों में तोड़ो, बीच का छूटा संबंध-शब्द वापस लाओ (और/या, का/के/की, है जो, का समूह), फिर विग्रह पढ़कर जाँचो कि अर्थ मूल शब्द से मेल खाता है।
कर्मधारय और बहुव्रीहि समास में क्या अंतर है? कर्मधारय में एक पद दूसरे का विशेषण होता है और शब्दार्थ प्रधान रहता है (नीलकंठ = नीला कंठ)। बहुव्रीहि में समस्त पद ही किसी अन्य संज्ञा का विशेषण बन जाता है (नीलकंठ = नीला है कंठ जिनका अर्थात् शिव) — शब्दार्थ गौण, तीसरा अर्थ प्रधान।
‘महावीर’ में कौन-सा समास है? बहुव्रीहि। विग्रह ‘महान वीर हैं जो अर्थात् हनुमान’ है — ‘है जो’ दिखने के बावजूद यह कर्मधारय नहीं है, क्योंकि अर्थ किसी तीसरे (हनुमान) की ओर जा रहा है। परीक्षा में यही ट्रैप बार-बार आता है।
स्रोत
स्रोत: समास की परिभाषा, छह भेद और समास-विग्रह — हिंदी विकिपीडिया का समास लेख; परिभाषा, भेदों के नियम, तत्पुरुष के उपभेद और उदाहरण — NCERT-आधारित CBSE Library का समास पेज।